बांका:लगातार तीन साल से पूरी तरह सुनसान रहने वाले कांवरिया पथ पर अचानक कांवरिया की भीड़ उमड़ पड़ी है। गंगाधाम से बाबाधाम तक एक बार फिर बाबा के जयकारे के साथ बोलबम की जयघोष गूंजने लगा है।इसमे चलने वाले कांवरिया अपने आप को बाबा भोलेनाथ के ससुराल से चलने वाले तिलकोत्सव के लिए आने की मान्यता है। इसलिए ऐसे कांवरिया अपने बाबा भोलेनाथ का साला बताते है। इस कांवरिया में महिला,पुरुष,बच्चे बच्चियां मोटे मोटे बांस के कांवर के साथ जल और अपने खाने पीने के जरूरी सामान लेकर चलते है। ऐसे कांवरिया दरभंगा,मधुबनी, समस्तीपुर,पूर्णिया,आदि जगहों से अपने वाहन द्वारा सुलतानगंज तक आते है फिर वहां से जल लेकर पैदल कांवरिया पथ से बाबाधाम तक आते है।जबकि जगह जगह रुक कर खाना बनाने के लिए उनके वाहन उपलब्ध सामानों से पूरा किया जाता है।इस कड़ाके की ठंड में कांवरिया का उत्साह देखते ही बनता है। इस कांवरिया की भीड़ को देखते हुए कांवरिया पथ पर सब्जी, फल,औऱ दही चूड़ा की दुकान बड़ी संख्या में खुल जाती है।जहां से कांवरिया अपने जरूरत का सामान खरीदते है। कांवरिया का यह भीड़ सरस्वती पूजा के एक सप्ताह तक जारी रहती है।

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