सरस्वती शिशु विद्या मंदिर पुनसिया में विभाग स्तरीय पूर्ववर्ती छात्र सम्मेलन का हुआ आयोजन

सरस्वती शिशु विद्या मंदिर पुनसिया में विभाग स्तरीय पूर्ववर्ती छात्र सम्मेलन का हुआ आयोजन

रजौन/बांका  :- प्रखंड के पुनसिया बाजार स्थित डॉ. जयप्रकाश मेहता सह नारायणी देवी सलारपुरिया सरस्वती शिशु विद्या मंदिर परिसर में रविवार को बांका विभाग स्तरीय पूर्ववर्ती छात्र सम्मेलन का आयोजन हुआ, जहां विद्या भारती, दक्षिण बिहार अंतर्गत बांका विभाग के प्रमुख ब्रह्मदेव प्रसाद सहित बांका विभाग अंतर्गत बौंसी, बांका, सुईया एवं मुंगेर जिले के संग्रामपुर संकुल के सभी 26 सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य एवं कुल 105 पूर्ववर्ती छात्र-छात्राएं मुख्य रूप से उपस्थित थे। इस कार्यक्रम की शुरुआत बांका विभाग प्रमुख ब्रह्मदेव प्रसाद, बौंसी संकुल के प्रमुख जितेंद्र कुमार, सरस्वती शिशु विद्या मंदिर पुनसिया के प्रधानाचार्य मुकुल कुमार, चमन साह सरस्वती शिशु विद्या मंदिर जगतपुर, बांका के प्रधानाचार्य मिथिलेश ठाकुर, विद्यालय शिक्षा समिति के अध्यक्ष देवनारायण मंडल, सचिव अशोक कुमार सहित अन्य ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस कार्यक्रम के दौरान मुख्य रूप से कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण, स्व का बोध, कर्तव्य एवं देश प्रथम का भाव जैसे 5 विषयों पर चर्चा की गई। वहीं इससे पूर्व कार्यक्रम के मौके पर उपस्थित मुख्य अतिथि विभाग प्रमुख ब्रह्मदेव प्रसाद समेत सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्य एवं पूर्ववर्ती छात्र-छात्राओं को अंग वस्त्र एवं कॉपी-कलम आदि देकर स्वागत किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान पूर्ववर्ती छात्र-छात्राओं ने बारी-बारी से अपने विद्यालय के दिनों की यादों एवं अनुभवों को सबके सामने रखा। इस दौरान पूर्ववर्ती छात्र-छात्राओं ने देश की प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और संस्कार को बनाए रखने में सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के योगदानों की सराहना करते हुए कहा कि विद्या भारती द्वारा संचालित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर देश की प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और संस्कारों को बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि ये शिक्षा को भारतीय मूल्यों और परंपराओं के साथ एकीकृत करते हैं, जिससे बच्चों का शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विकास होता है। ये विद्यालय राष्ट्रवादी शिक्षा, चरित्र निर्माण तथा भारतीय शिक्षा दर्शन को समृद्ध करने पर बल देते हैं। वहीं कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विभाग प्रमुख ब्रह्मदेव प्रसाद ने सरस्वती शिशु मंदिर के स्थापना काल से लेकर अब तक के इतिहास व कार्यों व उपलब्धियों को बताते हुए कहा कि सरस्वती शिशु मंदिर की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े कृष्णचंद्र गांधी, भाऊराव देवरस और नानाजी देशमुख की प्रेरणा से 1952 में गोरखपुर में हुई थी। यह विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान का एक हिस्सा है और इसका उद्देश्य बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और संस्कारों का ज्ञान देना है। इन विद्यालयों की स्थापना का मुख्य उद्देश्य सुयोग्य शिक्षा और नैतिक संस्कार देना था और आज ये देश के विभिन्न हिस्सों में शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। वहीं इस कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में सरस्वती शिशु विद्या मंदिर पुनसिया के आचार्य ब्रह्मदेव यादव, वासुदेव यादव, राजेश सिंह, प्रिंस कुमार पांडेय, संजय चौधरी, अवध बिहारी, आचार्या कंचन माला, संगीता सिन्हा, कंचन कुमारी, लक्ष्मी कुमारी, छाया कुमारी, मीडिया प्रमुख उज्ज्वल मिश्रा, कार्यक्रम के संयोजक अमित कुमार मंडल, सह संयोजक अमित केशरी, रमण चौधरी सहित अन्य का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
रिपोर्ट: समाचार संपादक कुमुद रंजन राव

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