कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) मधोपुर के तत्वावधान में नाबार्ड एफएसपीएफ (NABARD FSPF) पोषित परियोजना के अंतर्गत पश्चिम चम्पारण क्षेत्र के सुदूर गांव गोबरहिया दोन में मशरूम उत्पादन विषय पर एक विशेष प्रशिक्षण सह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में लगभग 80 किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से मशरूम उत्पादन सीखने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को मशरूम उत्पादन की उन्नत एवं वैज्ञानिक तकनीकों से परिचित कराना था, जिससे वे अपनी आय में वृद्धि कर सकें तथा खेती के साथ एक अतिरिक्त लाभकारी व्यवसाय अपना सकें। कम लागत और अधिक मुनाफे के कारण मशरूम उत्पादन किसानों की बनती जा रही पसंद ।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को बताया गया कि मशरूम उत्पादन एक ऐसा व्यवसाय है, जिसमें कम पूंजी में अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इसकी खेती के लिए अधिक भूमि की आवश्यकता नहीं होती तथा इसे नियंत्रित वातावरण में भी सफलतापूर्वक किया जा सकता है।
कार्यक्रम में जिला कृषि विभाग से उप निदेशक आत्मा, पश्चिम चंपारण श्री भारत भूषण ने मशरूम उत्पादन को किसानों के लिए एक व्यवहारिक और लाभकारी विकल्प बताया। उन्होंने किसानों को सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं अनुदानों की जानकारी दी तथा मशरूम उत्पादन के व्यावसायिक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
*मशरूम उत्पादन से आत्मनिर्भर बन रहे हैं किसान*
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. सौरभ दुबे (विषय विशेषज्ञ, पौध संरक्षण) ने कहा कि मशरूम की खेती से किसान अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि आज बिहार में कई किसान मशरूम उत्पादन को अपनाकर आत्मनिर्भर बन चुके हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी खेती को एक नए स्तर तक ले जा रहे हैं।
बटन, ऑयस्टर एवं दूधिया (मिल्की) मशरूम की तकनीकी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान किसानों को बटन, ऑयस्टर एवं दूधिया (मिल्की) मशरूम की खेती से संबंधित विस्तृत तकनीकी जानकारी प्रदान की गई। इसमें मशरूम बीज (स्पॉन) की पहचान, गुणवत्ता, उत्पादन प्रक्रिया, विपणन तकनीक एवं भंडारण के वैज्ञानिक उपायों पर विशेष रूप से चर्चा की गई। इस अवसर पर किसानों के बीच मशरूम स्पॉन का वितरण भी किया गया।
किसानों को यह भी बताया गया कि मशरूम उत्पादन में तापमान और नमी का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। सही तकनीक अपनाकर उत्पादन बढ़ाया जा सकता है तथा स्थानीय बाजारों में बिक्री कर अच्छी आय अर्जित की जा सकती है।
लाइव डेमोंस्ट्रेशन से मिला व्यावहारिक अनुभव
प्रक्षेत्र दिवस के दौरान किसानों को मशरूम उत्पादन का लाइव डेमोंस्ट्रेशन दिखाया गया, जिससे वे इसकी पूरी प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकें। इस सत्र में विभिन्न प्रकार की मशरूम इकाइयों, पोषक तत्वों की भूमिका, रोग प्रबंधन तथा विपणन तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई।
इस दौरान तकनीकी सहायक श्री बैजू कुमार ने मशरूम उत्पादन की व्यावहारिक प्रक्रिया को सरल तरीके से समझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
*किसानों में दिखा उत्साह, कई किसानों ने लिया उत्पादन शुरू करने का संकल्प*
कार्यक्रम के दौरान किसानों ने मशरूम उत्पादन को लेकर गहरी रुचि दिखाई। कई किसानों ने मौके पर ही अपने खेतों एवं घरों में मशरूम उत्पादन शुरू करने की इच्छा व्यक्त की।
एक स्थानीय किसान ने कहा,
“मशरूम उत्पादन की प्रक्रिया को देखकर मुझे बहुत कुछ नया सीखने को मिला।
*केवीके मधोपुर के सतत प्रयास:वैज्ञानिक तरीकों से किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल*
केवीके मधोपुर द्वारा समय-समय पर किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहा है। इस कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए भविष्य में भी इसी तरह के विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक किसान मशरूम उत्पादन को अपनाकर आत्मनिर्भर बन सकें।
संक्षेप में कार्यक्रम के मुख्य बिंदु
✔ लगभग 80 किसानों की सक्रिय भागीदारी
✔ मशरूम उत्पादन की संपूर्ण प्रक्रिया पर विशेष प्रशिक्षण
✔ बटन, ऑयस्टर एवं दूधिया (मिल्की) मशरूम की खेती पर विस्तृत चर्चा
✔ लाइव डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से व्यावहारिक ज्ञान
✔ मशरूम स्पॉन का वितरण
✔ डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह के मार्गदर्शन में कार्यक्रम का सफल आयोजन
यह कार्यक्रम किसानों के लिए अत्यंत लाभदायक सिद्ध हुआ और कई किसानों ने मौके पर ही मशरूम उत्पादन को अपनाने का दृढ़ निश्चय किया
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