चांदन अंचल में काफी पूर्व से चल रहा है सरकारी जमीन को रैयती बनाने का खेल।

चांदन अंचल में काफी पूर्व से चल रहा है सरकारी जमीन को रैयती बनाने का खेल।

बांका:चांदन प्रखंड मुख्यालय सहित सिलजोरी, बिरनिया,गौरीपुर, कोरिया,पंचायत में बिहार सरकार की जमीन को रैयती बना कर उसका राजस्व रसीद निर्गत कर दिया गया है। अगर इस प्रखंड में इसकी समुचित जांच कराई जाय तो बड़ी संख्या में सरकारी जमीन की बंदरबांट का खुलाशा सामने आएगा। इतना ही नहीं इस प्रखंड में बड़ी संख्या में दलित परिवार को सरकार द्वारा बंदोबस्त किया गया जमीन या तो बिक्री कर दिया गया है या उस जमीन पर किसी अन्य का कब्जा है।इस संबंध में काफी शिकायत के बाद पूर्व अवर समाहर्ता माधव कुमार सिंह द्वारा कांवरिया पथ सहित बिरनिया पंचायत के सैकड़ों फर्जी जमाबंदी को रद्द कर दिया गया था। लेकिन उस आदेश के बाद भी अंचल कार्यालय द्वारा उस जमाबंदी को कार्यरत रखा गया है। और अब उसी जमीन को भू माफिया द्वारा बेचा भी जा रहा है। जिसका बिना किसी जांच पड़ताल में दाखिल खारिज भी कर दिया जा रहा है। इसका ताजा उदाहरण इस दिनों चांदन हाट की जमीन पर धीरे धीरे कब्जा किया जा रहा है। इसी प्रकार उच्च विद्यालय के पास पक्की सड़क के किनारे पूर्व से निर्धारित पंचायत भवन की जमीन पर भी अवैध कब्जा कर लिया गया है। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि कब्जाधारी अब उस जमीन पर फर्जी कागजात के आधार पर रसीद प्राप्त कर निर्माण भी शुरू कर दिया था। जिसे अंचल द्वारा रोका गया है।इसी प्रकार कांवरिया पथ के दुम्मा सीमा से भूलभुलैया तक और चांदन देवघर और कटोरिया वाली पक्की सड़क के किनारे 
दर्दमारा से सिलजोरी मोड़ तक बिहार सरकार और दलित परिवार को बंदोबस्त की गई जमीन की धड़ल्ले से बिक्री हुई और उस पर निर्माण कार्य भी किया गया। जबकि बंदोबस्त वाली बिक्री योग्य नहीं होती है। उसी प्रकार चांदन नदी पुल के दोनों तरफ बिहार सरकार की जमीन,गोचर भूमि के साथ पीडब्लूडी सड़क की जमीन भी स्थानीय पदाधिकारियों की मिली भगत से भूमाफिया की भेट चढ़ चुका है उस जमीन की घेराबंदी कर उसे बेचने का काम किया जा रहा है। इतना ही नहीं प्रखंड मुख्यालय के अगल सरकारी पोखर,किसान भवन,पंचायत भवन,यात्री शेड पर भी कई जगह अवैध कब्जा किया गया है। लेकिन इसपर किसी का कोई ध्यान नहीं है।इस संबंध में पूछने पर सीओ रविकांत कुमार का कहना है कि जहां जहां से शिकायतें मिल रही है उस पर संज्ञान लेकर नोटिस कर उसे खाली कराया जा रहा है और जो फर्जी जमाबंदी सामने आता है। उसके रद्दीकरण के लिए वरीय पदाधिकारी को प्रस्ताव भेजा जा रहा है।

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