रजौन, बांका :- बिहार में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अंतर्गत कार्यरत कर्मियों और पदाधिकारियों के बीच व्याप्त गहरा असंतोष अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है, जहां करीब 9 महीने पहले हुए समझौते के बावजूद मांगों के पूरा न होने पर राजस्व सेवा महासंघ और बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ ने संयुक्त रूप से विगत 9 मार्च से अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश और महा-हड़ताल का बिगुल फूंक दिया है। इस साझा आंदोलन की पृष्ठभूमि जून 2025 में अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई उस वार्ता से जुड़ी है, जिसमें राजस्व कर्मचारियों का ग्रेड-पे 1900 से बढ़ाकर 2800 करने, पदनाम बदलकर 'सहायक राजस्व अधिकारी' करने, गृह जिला के पास स्थानांतरण और डिजिटल कार्य हेतु लैपटॉप-मोबाइल की सुविधा जैसे 17 सूत्री मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन धरातल पर क्रियान्वयन न होने से कर्मियों में गहरा रोष है। वर्तमान में कर्मचारी स्नातक योग्यता के आधार पर 4200 ग्रेड-पे और राजस्व अधिकारी के पदों पर प्रोन्नति कोटा बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की मांग कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर राजपत्रित पदाधिकारियों के बीच विवाद की मुख्य जड़ भूमि सुधार उप समाहर्त्ता के 101 पदों पर पदस्थापना का मामला है, जो बिहार राजस्व सेवा नियमावली, 2010 के अनुसार इस संवर्ग के द्वितीय प्रोन्नति स्तर का मूल पद है। पटना उच्च न्यायालय ने सीडब्ल्यूजेसी संख्या- 5902/2024 में 19 जून 2025 को स्पष्ट आदेश दिया था कि प्रोन्नत राजस्व सेवा के पदाधिकारियों को 3 महीने के भीतर डीसीएलआर के पद पर तैनात किया जाए। सरकार द्वारा इस आदेश की अनदेखी करने पर एमजेसी संख्या- 2380/2025 के तहत अवमानना वाद दायर हुआ, जिसमें न्यायालय ने 30 जनवरी 2026 को कड़ी फटकार लगाते हुए 3 सप्ताह के भीतर अनुपालन का अंतिम अवसर दिया था। प्रशासनिक विसंगति तब और भयावह हो गई, जब सरकार ने 29 जनवरी 2026 को कैबिनेट के निर्णय से डीसीएलआर का पद राजस्व सेवा से हटाकर सामान्य प्रशासन विभाग के अधीन कर दिया और इसे बिहार प्रशासनिक सेवा केकेआर अधिकारियों के लिए आरक्षित कर दिया। यह व्यवस्था पदानुक्रम के सिद्धांतों का उल्लंघन है, क्योंकि इसमें वरीय अपीलीय अधिकारी और अधीनस्थ अंचल अधिकारी दोनों को एक ही वेतन स्तर (पे-मैट्रिक्स लेवल 9) पर रख दिया गया है। हालांकि 5 फरवरी 2026 को विभागीय मंत्री के साथ वार्ता में 12 फरवरी तक अधिसूचना निर्गत करने का मौखिक आश्वासन मिला था, लेकिन एक महीने बाद भी कोई ठोस पहल न होने से संयुक्त मोर्चा ने हड़ताल को अनिवार्य बताया है। इस महा-हड़ताल के कारण पूरे बिहार के अंचल कार्यालयों में जाति, आवासीय, आय प्रमाण पत्र और दाखिल-खारिज जैसे जनसरोकार के सभी कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं, जिससे आम जनता को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
रिपोर्ट:- के आर राव
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