बांका सहकार भवन में पैक्स और व्यापार मंडल के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला संपन्न

बांका सहकार भवन में पैक्स और व्यापार मंडल के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला संपन्न

पैक्स को 'सिंगल विंडो' के रूप में विकसित कर जवाबदेही और आय बढ़ाएं - डीसीओ

​बांका : स्थानीय सहकार भवन के प्रांगण में बुधवार को जिला स्तरीय पैक्स अध्यक्षों, प्रबंधकों एवं व्यापार मंडल अध्यक्षों के लिए एक दिवसीय भव्य प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसका विधिवत उद्घाटन सहयोग समितियां, बिहार के सेवानिवृत्त अपर निबंधक अजय कुमार अलंकार द्वारा किया गया। इस कार्यशाला में भागलपुर प्रमंडल के संयुक्त निबंधक प्रभाकर कुमार एवं संयुक्त निबंधक (अंकेक्षण) मुकेश कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने शिरकत की, जहाँ अजय कुमार अलंकार ने प्रशिक्षक व विशिष्ट अतिथि के रूप में पैक्स के प्रशासनिक एवं वित्तीय दायित्वों, पैक्स में व्यावसायिक विविधीकरण, उद्यमशीलता, लेखा संधारण और अंकेक्षण जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बिहार को-ऑपरेटिव सोसायटी अधिनियम-1935 एवं नियमावली 1959 के विभिन्न प्रावधानों सहित धारा 41 (5), धारा 48, धारा 40 सरचार्ज एवं एवार्ड केस जैसे कानूनी पहलुओं की जानकारी देते हुए उपस्थित प्रतिनिधियों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक किया। ​इसी क्रम में संयुक्त निबंधक प्रभाकर कुमार ने धान अधिप्राप्ति, गोदाम निर्माण, बिहार राज्य फसल सहायता योजना और मुख्यमंत्री हरित कृषि संयंत्र योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु सावधानी बरतने और नियमानुकूल कार्य करने पर जोर दिया, जबकि मुकेश कुमार ने समितियों के अंकेक्षण की महत्ता को रेखांकित किया। दी भागलपुर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के अध्यक्ष जितेंद्र कुमार सिंह एवं प्रबंध निदेशक ने बैंक की सुविधाओं को जनोपयोगी बनाने, भविष्य में बैंक को विकसित करने, डिपॉजिट मोबिलाइजेशन और किसान क्रेडिट कार्ड निर्गत करने का भरोसा दिलाया। वहीं इफ्को के एरिया मैनेजर संदीप कुमार ने खाद लाइसेंस प्राप्त कर समिति की आय बढ़ाने तथा सीएससी के जिला प्रबंधक प्रियरंजन कुमार ने किसानों को डिजिटल सुविधाएं प्रदान करने और वित्तीय संव्यवहार बढ़ाने पर चर्चा की। ​जिला सहकारिता पदाधिकारी (DCO) मोहम्मद जैनुल आबदीन अंसारी ने अपने संबोधन में पैक्सों की कार्यप्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन की आवश्यकता पर बल देते हुए स्पष्ट किया कि पैक्सों को केवल धान अधिप्राप्ति तक सीमित रखना घाटे का सौदा साबित हो रहा है, जिससे कई समितियां उजड़ रही हैं। उन्होंने कड़े निर्देश दिए कि अब पैक्स को कृषि समृद्धि केंद्र और कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में विकसित कर व्यावसायिक विविधीकरण लाना अनिवार्य है। निबंधक के आदेशानुसार अब हर समिति के लिए 'एनुअल स्टेटमेंट' (वार्षिक विवरणी) दाखिल करना और वित्तीय वर्ष की समाप्ति के छह माह के भीतर 'अंकेक्षण' कराना अनिवार्य होगा। उन्होंने आगाह किया कि ऑडिट न कराने वाली समितियों में गबन की आशंका बनी रहती है, जैसा कि पूर्व में 'सृजन' जैसे बड़े घोटालों में देखा गया है, अतः पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सभी पैक्सों को 'सिंगल विंडो' सिस्टम के रूप में विकसित होना होगा ताकि उनकी आय बढ़ सके और किसानों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। इस आयोजन में बड़ी संख्या में पैक्स प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को सफल बनाया।

रिपोर्ट : केआर राव

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