जिले में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ 680 किमी मानव श्रृंखला का निर्माण


बेतिया। जिलाधिकारी ने जिलेवासियों सहित सभी सरकारी पदाधिकारी, कर्मियों, छात्र-छात्राओं, जनप्रतिनिधियों आदि को दिया साधुवाद। जिलाधिकारी, डाॅ0 निलेश रामचंद्र देवरे ने कहा कि आज जल-जीवन-हरियाली, नशामुक्ति के समर्थन में तथा बाल विवाह-दहेज प्रथा मिटाने के उदेश्य से राज्यव्यापी मानव श्रृंखला का निर्माण आज किया गया है। पश्चिम चम्पारण जिले में 680 किमी लंबी मानव श्रृंखला का निर्माण सफलतापूर्वक किया गया। जिलाधिकारी कहा कि मानव श्रृंखला निर्माण में अपनी-अपनी भागीदारी देने वाले समस्त जिलेवासी, पदाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी, कर्मी, छात्र-छात्राएं, जनप्रतिनिधि आदि धन्यवाद के पात्र है। जिन्होंने जल-जीवन-हरियाली अभियान की सफलता हेतु आयोजित मानव श्रृंखला में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने, आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण देने के लिए राज्य सरकार द्वारा जल-जीवन-हरियाली अभियान की शुरूआत की गयी है। आज मानव श्रृंखला का निर्माण जन जागरूकता कार्यक्रम के तहत किया गया है। उन्होंने कहा कि कड़ाके की ठंड के बावजूद मानव श्रृंखला में बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से निकल कर अपनी भागीदारी निभाये हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग इस मानव श्रृंखला में अपनी सहभागिता किसी कारण से नहीं दे पाये हैं जिला प्रशासन उनलोगों तक जल-जीवन-हरियाली से होने वाले फायदों से अवगत करायेगा। जिलाधिकारी ने कहा कि जिले में जल-जीवन-हरियाली अभियान अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों का क्रियान्वयन तीव्र गति से किया जायेगा ताकि हम सभी को तथा आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण मिल सके। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं जैसे कुओं, तालाबों, पोखरों, आहरों, पईनों को चिन्हित कर उन्हें अतिक्रमणमुक्त करते हुए उनका जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। इसके साथ ही सार्वजनिक कुओं, चापाकलों, नलकूपों के किनारे सोख्ता तथा अन्य जल संचयन संरचनाओं का निर्माण भी तीव्र गति से किया जायेगा। उन्होंने कहा कि जिले के छोटी-छोटी नदियों, नालों में एवं पहाड़ी क्षेत्रों में चेकडैम एवं जल संचयन के अन्य संरचनाओं के निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। भवनों में छत-वर्षा जल संचयन की संरचनाओं का निर्माण कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को हरा-भरा रखने के लिए पौधशाला सृजन एवं सघन वृक्षारोपण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जल-जीवन-हरियाली को बल देने हेतु वैकल्पिक फसलों, ड्रिप एरिगेशन, जैविक खेती एवं अन्य नई तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही सौर ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहित करते हुए ऊर्जा की बचत भी करनी होगी।

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