विवाह को संस्कार से सुसज्जित रखो अहंकार से नहीं

विवाह को संस्कार से सुसज्जित रखो अहंकार से नहीं


(वूमेन एक्सप्रेस ब्यूरो) बेतिया। राधा गोविन्द की महती कृपा के फलस्वरूप श्री कृष्णानुरागी युवा भागवत प्रवक्ता पं० शिवम् विष्णु पाठक ने भागवत कथा के दिव्य षष्टम दिवसीय भागवत प्रसंगों का वर्णन कियाI सभापति गरिमा देवी सिकारिया सहित समस्त श्रोताओं ने इस सप्ताह व्यापी ज्ञान यज्ञ में अद्भुत आनंद लिया I पं० पाठक ने षष्टम दिवस के प्रारंभ में गोवर्धन प्रभु के उतरार्ध चरित्र की चर्चा की I गिरधारी प्रभु के द्वारा इन्द्र का मान मर्दन किया गया I श्रोताओं से भरपूर पण्डाल में कथा व्यास ने रास प्रसंग पर जब चर्चा करी तो मानों ऐसा प्रतीत हो रहा था , जैसे मुरली लेकर साक्षात् गोविन्द ही हजारी मल धर्मशाला में पधारें हों I पं० पाठक ने कहा कि रास प्रसंग कोई मजाक नहीं बल्कि रास प्रसंग गोविन्द की सर्वश्रेष्ठ लीला है, जो प्राणी के मन को काम से परे करती है I माता यशोदा को आश्वासन देकर गोविन्द प्रभु वृन्दावन से मथुरा गए I धोबी का उद्धार किया, सुदामा नाम के माली से माला पहनी, कुब्जा का उद्धार किया I 11 वर्ष की आयु में ही प्रभु श्री कृष्ण नें अपने मामा का उद्धार किया एवं मथुरा वासियों को कंस के त्रास से मुक्ति दिलायी I कंस के वध पर चर्चा करते हुए पं० पाठक ने कहा कि तुम कुछ भी सही कितने ही बड़े हो एक बात का ध्यान रखो बुरे व्यक्ति का अंत बुरा ही होता है I उद्धव-गोपी संवाद के माध्यम से गोपियों के ज्ञान की विविधता का वर्णन किया गया I उद्धव को प्रेम का पाठ गोपियों नें प्रदान किया I जरासंध से युद्ध के पश्चात गोविन्द नें भक्तों के हित के लिए द्वारिका की दिव्य नगरी बसाई I बलराम प्रभु का विवाह माता रेवती के संग हुआ I श्री कृष्ण का विवाह विदर्भ नरेश राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मणि से हुआ I नप सभापति गरिमा देवी सिकारिया, प्रकाश सिकारिया, गौरव सिकारिया, मयूर सिकारिया, राजेश सिकारिया, प्रेमा देवी सिकारिया, विक्की सिकारिया, किशोरी लाल सिकारिया, नीरज गोयल, अमन पोद्दार नें रुक्मणी-कृष्ण की झांकी का पूजन किया I कथा के विश्राम दिवस 10 जनवरी को प्रभु के विभिन्न विवाह का वर्णन होगा I सुदामा चरित्र का वर्णन होगा I कथा के मुख्य बिंदु:- • रास प्रभु श्री कृष्ण का सर्वश्रेष्ठ प्रसंग, यह हमें काम विजय का मार्ग बताता है I • पुत्रियाँ सर्वश्रेष्ठ धन I • पुत्र होगा I तुम्हारे भाग्य से पुत्रियाँ होंगी तुम्हारे सौभाग्य है • जीवन में स्वयं का हित चाहते हो तो दूसरों का पहले करो रहा।

Post a Comment

0 Comments