किसानो को आत्मनिर्भर बनाया जाए

किसानो को आत्मनिर्भर बनाया जाए



अजय प्रताप तिवारी "चंचल" । 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश  में देशवासियों को 
 आत्मनिर्भर होने पर जोर दिया है । ये संदेश ऐसे समय पर है  पर आया है। जब  भारत समेत पूरा विश्व वैश्विक महामारी कोरोना के कहर  से जूझ रहा  है। और  देश में लॉक डाउन का तीसरा चरण चल रहा है ,और  किसी को नही पता कि यह लॉक डाउन कब तक चलेगा।  फिलहाल वर्तमान स्थिति को देखते हुए ये अनुमान लगाया जा सकता है कि ये लम्बा खींचने वाला है ।
ऐसे में सबसे ज्यादा आत्मनिर्भर बंनाने की जरूरत है जिसे  वो है किसान । किसान देश की जनता के लिए अनाज पैदा करता है । देश की आजादी से लेकर आज तक किसानों की समस्या हमेशा से बनी रही है । देश के किसानों पर राजनीति होती है ,लक्षेदार भाषण दिया जाता है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ  और रहता है । किसान हमेशा से  छल कपट का शिकार होता है । प्रकृति भी किसान का साथ नही देती है । वर्तमान समय में किसान की सबसे बड़ी समस्या  ,बेमौसमी वर्षा ,सूखा ,बाढ़,कृषि ऋण  एवं अन्य प्रकार की समस्या से किसान हमेशा घिरा रहता है। और 
यही करण है कि किसान आत्म हत्या करने के लिए मजबूर  हो जाता है ।  किसान को आत्मनिर्भर बनाया जाए ,इसके लिए उनमें नई तकनीकी जागरूकता ,कृषि शिक्षा,औपचारिक  ऋण  समझ,फसलिकरणक की समझ ,मिटटी की उर्वरता के लिए निर्देश ,डिजिटल सुविधाएँ ,बीज,उर्वरक जैसी वस्तुओं पर विशेष रियायतें ,कृषि बाजार का विस्तार ,कृषि एवं  उससे सम्बंधित उत्पादों के लिए उचित मूल्य,बिचौलियों की भूमिका समाप्ति पर बल देने के साथ ग्रामीण क्षेत्रो ग्रामीण  उघोगों पर बल दिया जाए ताकि किसानों को रोजगार के विकल्प मिल सके । हमें आज गांधी जी को याद करना होगा क्यों गांधीवादी अर्थव्यवस्था ही एक मात्र उपाय है जो किसान हित में हो सकता है।गांधीवादी दर्शन के मूल में यह विचार स्थापित है कि खेती और ग्राम्य जीवन एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और गाँवों का जीवन स्तर सुधारने के लिए खेती की बेहतरी ज़रूरी है। एक राजनैतिक और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर गाँव की संकल्पना बिना किसानों को आत्मनिर्भर बनाये साकार होनी संभव नहीं है। गांधी दर्शन के आत्मनिर्भरता के विचार में अपनी जड़ें ढूंढ़ते हुए आधुनिक परिवेश के लिए आवश्यक कदम उठाये जाएँ।
     - फेसबुक वाँल से 




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