आगरा के पत्रकार पंकज कुलश्रेष्ठ का कोरोना से निधन, अलविदा पंकज ।

            (  रविश कुमार) 

इस वक्त आगरा की पत्रकार बिरादरी बहुत ग़मज़दा है। दैनिक जागरण के पत्रकार पंकज कुलश्रेष्ठ का कोविड-19 के कारण निधन हो गया है। पंकज जी की तबीयत ख़राब होने लगी थी। 4 मई को पता चला कि उनका रिजल्ट पोजिटिव आया है। उसके बाद आगरा के अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां से वे वापस नहीं आ सके। दैनिक जागरण में पंकज जी ने लंबे समय तक सेवा की है। 1994 से एक ही अखबार में काम करते रहे। मथुरा के ब्यूरो चीफ रहे। वो भी आठ साल तक। यह जानकर बहुत अफसोस हुआ कि पंकज कुलश्रेष्ठ नहीं रहे। मथुरा में काफी लोग उन्हें जानते थे। दैनिक जागरण समूह के भीतर भी पत्रकारों में काफी लोकप्रिय थे। पंकज जी इस अखबार के यहां 25 साल का अनुभव छोड़ गए हैं। 

50 साल के पंकज कुलश्रेष्ठ कोविड-19 से मरे हैं। हमारे लिए वे भी कोरोना योद्धा हैं। यूपी सरकार को पंकज के परिवार को एक करोड़ की राशि देनी चाहिए। पत्नी को नौकरी भी। जागरण एक साधन संपन्न अखबार है। इसे भी अपनी तरफ से उचित राशि देनी चाहिए। इस अख़बार  के कई पत्रकार सरकार की वकालत करते हैं। उनसे भी निवेदन हैं कि पंकज जी के लिए सरकार से बात करें और एक करोड़ की राशि और पंकज जी की पत्नी को सरकारी नौकरी दिलवाएं। मैं सरकार से मांग कर रहा हूं। कोई विरोध नहीं कर रहा।  

आगरा में और भी पत्रकार कोविड-19 से संक्रमित हैं। उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूं। आगरा और मथुरा के पत्रकार और पाठक बेहद उदास होंगे। मैं समझता हूं। पंकज जी मथुरा जागरण में 8 साल ब्यूरो चीफ रहे। 
जागरण को पंकज जी के निधन की खबर सिर्फ संक्षिप्त सूचना के तौर पर नहीं छापनी चाहिए थी। कम से कम उनके सभी काम के बारे में विस्तार से बताना चाहिए था। उनकी खबरों का कोलाज बनाकर एक विशेष पेज तो निकाला ही जा सकता था। पंकज के निधन की खबर पेज नंबर चार पर छपी है।
             ( रविश कुमार के फेसबुक पेज से  )


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