काठमांडू | राजदूत नीलाम्बर आचार्य का सीमा विवाद पर भारतीय अधिकारी से बात करने की सभी कोशिश बेकार हो गई है, राजदूत आचार्य राजधानी दिल्ली में भारत के वरिष्ठ नौकरशाहों से बात करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन अभी तक उनकी किस्मत साथ नहीं दे रही है । यह बात नेपाल के बरिष्ट पत्रकार तथा विश्लेषक अनिल गिरी ने काठमांडू पोस्ट में आज के अपने एक विस्तृत आलेख में लिखी है |
जैसा कि हाल ही में सीमा विवादों को लेकर राजनयिक स्तर पर बातचीत शुरू करने के लिए नेपाल और भारत दोनों पर दबाव बढ़ रहा है, भारत में नेपाल के राजदूत को भारतीय विदेश मंत्रालय के किसी भी अधिकारी से संपर्क में आने में मुश्किल हो रहा है । यह एक संकेत हो सकता है कि भारत ने नेपाल के एक नए राजनीतिक और प्रशासनिक मानचित्र को जारी करने के बाद अपनी स्थिति को सख्त कर लिया है, जिसमें लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी सहित सभी विवादित क्षेत्र शामिल हैं।
जबकि इधर काठमांडू में नेपाल के अधिकारीगण कह रहें है कि नेपाल काठमांडू और नई दिल्ली के बीच बातचीत के लिए अनुकूल माहौल बनाने के लिए दोनों औपचारिक और अनौपचारिक रूप से काम कर रहा है | उधर नई दिल्ली में नेपाली राजदूत नीलाम्बर आचार्य सम्पर्क वा बातचीत करने में पूर्णत:असफल हो रहें हैं नेपाली दूतावास में राजनयिक स्रोत के अनुसार ।
नेपाली दूतावास के एक राजनयिक ने पोस्ट से कहा, “राजदूत आचार्य की असफलता कोशिश की कमी के कारण नहीं है। बल्कि भारतीय अधिकारी उनसे मिलने से इंकार करते आ रहे हैं जो कि एक बहुत ही मुश्किल वातावरण पैदा कर दिया है की किससे बातचीत करनी है।”
उधर राजदूत आचार्य ने कहा है कि वे औपचारिक और अनौपचारिक दोनों माध्यमों से बातचीत करने का प्रयास जारी रख रहें हैं।
आचार्य ने नई दिल्ली से फोन पर पोस्ट को कहा है कि “मैं आपको बता नहीं सकता कि हम किस किस स्तर पर बात करने का प्रयास कर रहें हैं, विभिन्न चैनलों के माध्यम से बात करने का प्रयास जारी है।” “लेकिन हमें अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि हम बातचीत किससे करेंगे और बातचीत के लिए कब बैठेंगे । हालांकि कोविद -19 के कारण स्थिति कठिन है, हमें एक रास्ता तलाशना होगा, और एकमात्र तरीका राजनयिक वार्ता है। अनिल गिरी द्वारा लिखित आलेख The Kathmandu Post से |
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