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(लेखक -अजय प्रताप तिवारी, फाइल फोटो)
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भारत ऐतिहासिक ,राजनितिक ,भौगोलिक एवं सांस्कृतिक उथल-पुथल का देश रहा है ,किन्तु कृषि हमेशा भारतीय अर्थव्यवस्था की मुख्य धारा रही है। भौगोलिक परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो भारत में कई तरह की मिट्टी पाई जाती है जो की कही अधिक उपजाऊ है तो कहीं कम उपजाऊ है ,कही महीन है तो कही कंकड़ -पत्थर ।इसी प्रकार मानसून पर कृषि की निर्भरता है, भारत में उत्पादन क्षेत्र को प्रभावित करता है । कही अधिक वर्षा होती है तो कही सूखे की स्थिति बन जाती ।जब हम मिठास की बात करते हैं, विशेषकर भोजन में मिठास की, तो हमारा ध्यान बरबस गन्ने की ओर जाता है। उससे हम अनेक रूपों में मिठास प्रदान करने वाले पदार्थ प्राप्त करते हैं, जैसे-गुड़, राब, शक्कर, खांड, बूरा, मिश्री,। चीनी आदि। यों मिठास प्राप्त करने के कुछ अन्य स्रोत भी हैं। मधु या शहद हमारे लिए प्रकृति का उपहार हैं जिसे वह मधुमक्खियों द्वारा फलों के रस से तैयार कराती है। दक्षिण भारत में ताड़ से गुड़ और शक्कर तैयार की जाती है। पश्चिम एशिया के देश खजूर से यह काम लेते हैं। यूरोपीय देश चुकंदर से चीनी तैयार करते हैं। अब सैकरीन नाम से कृत्रिम चीनी भी बाजार में उपलब्ध है, जो मधुमेह के रोगियों के लिए भी निरापद बताई गई है।फिर भी चीनी या उसकी शाखा-प्रशाखाओं को प्राप्त करने का सबसे प्रमुख स्रोत गन्ना ही है। कहते हैं, विश्व में जितने क्षेत्र में गन्ने की खेती की जाती है, उसका लगभग आधा हमारे देश में है। कोई आश्चर्य नहीं कि गन्ने की फसल हमारे देश की सबसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक फसलों में से एक है और चीनी उद्योग हमारे देश के प्रमुख उद्योगों में है। हालांकि इस उद्योग को बहुत पुराना नहीं कहा जा सकता चूंकि चौथे दशक के बाद, या दूसरे महायुद्ध के दौरान ही इसका तेजी से विकास हुआ है।किन्तु शक्कर, गुड़, मिश्री आदि के बारे में यह बात नहीं कही जा सकती। हजारों वर्षों से यह उद्योग यहां स्थापित हैं, बल्कि हम अति प्राचीन काल से ही विश्व के प्राय: सभी भागों को इनका निर्यात करते रहे हैं। प्राचीन रोम, मिस्त्र, यूनान, चीन, अरब आदि सभी देशों को ये वस्तुएं जाती रही हैं। कुछ वर्ष पूर्व तक हमारा देश चीनी का निर्यातक भी रहा है। कुछ आंतरिक खपत में वृद्धि के कारण और कुछ विभिन्न कारणों से उत्पादन में कमी के कारण इस वर्ष हमें विदेशों से चीनी का आयात करने को बाध्य होना पड़ा है।
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| (लेखक अपने गाँव के खेत में कुदाल को पकड़े हुए। फाईल फोटो) |
खेती किसानी अपनी है गन्ने की गुड़ाई ,किसान के गन्ने से चीनी बनती है ,चीनी से मिठाई बनती है जो पूँजीवादी के हक में चला जाता है ।किसान सबके लिए मिठास पैदा करता है अपने लिस सिर्फ गन्ना । ये गन्ने हमारे शैक्षणिक स्तर को ऊंचा उठाने मे बड़ा योगदान देते है ।
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