सम्पूर्ण कांवरिया पथ वीरान

सम्पूर्ण कांवरिया पथ वीरान



आमोद दुबे व्यूरो की रिपोर्ट
बांका:सावन का महीना शुरू होने में अब सिर्फ 6 दिन का समय शेष रह गया है । हर साल इस समय कांवरिया पथ में चहल-पहल चरम सीमा पर होती थी। दुकान लगाने के लिए भाड़े पर   जमीन खरीदने, दुकानों के लिए प्लाष्टिक, बांस खरीदने और अन्य तरह के सामान खरीदने वालों की बाजारों में भीड़ होती थी। बाहरी दुकानदार, स्वयंसेवी संस्थाएं अपना-अपना टेंट लगाने में इन दिनों बेहाल दिखते थे। लेकिन कांवरिया मेला पर कोरोना का ग्रहण लगने से  संपूर्ण कांवरिया पथ पूरी तरह उदास लग रहा है। कहीं से भी किसी तरह की कोई तैयारी नहीं चल रही। सरकार द्वारा मेला नहीं लगाने के आदेश के बाद बाहर से आए कामगार ज्यादा प्रभावित हुए हैं। बाहर से आने वाले अधिकतर कामगार कांवरिया पथ में अपनी दुकान लगाने की सोच कर आए थे। लेकिन यहां आने के बाद उनकी मंशा पर पानी फिर गया। अब वे अपना अधिकतर समय खेती में लगा रहे हैं। सरकारी विभाग का काम भी कांवरिया पथ पर पूरी तरह बंद है। धर्मशाला भी पूरी तरह सुना पड़ा हुआ है। सावन महीने की कमाई से कांवरिया पथ के हजारों लोग साल भर का व्यवसाय मानकर अपना धंधा चलाते थे। और स्थानीय लोगों की मानें तो सावन मेला नहीं लगने के कारण अपराध में वृद्धि होना निश्चित है। 

महीने भर चलने वाला यह विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला को के भरोसे ही कोरोना के लॉकडाउन के बीच प्रवासी की उम्मीद इसी सावन से जुड़ी हुई थी। और उन्हें यह भरोसा था कि वे महीने भर सावन में अपना व्यवसाय कर परिवार का पालन पोषण कर सकेंगे। सावन मेला पर बिहार और झारखंड सरकार के द्वारा मेला पर प्रतिबंध के बाद लोगो मे घोर निराशा हुई है।जिससे इस क्षेत्र में अपराध में बढोत्तरी की भी संभावना बढ़ गयी है।