*बुधवार की पहली किरण ब्रह्मदेव तूरी की जिंदगी की आखरी किरण रही*
*समाजसेवी भी था ब्रह्मदेव दूरी गांव वालों की करता था मदद*
देवघर से जीतन कुमार ।
देवघर में जमीन विवाद कोई नई बात नहीं है कई जमीन माफिया जमीन के कारोबार को कर करोड़पति बन बैठे हैं देवघर में तकरीबन 20 वर्षों के जमीन कारवार के इतिहास को अगर खंगाला जाय तो यहां के जमीन कारोबार बड़े शहरों के दर के बराबर है लेकिन इतना उचा दर होने के बाद भी जमीन खरीदारों की कोई कमी नहीं है इसी को लेकर देवघर में हर कोई आज जमीन के काले कारोबार से जुड़ गया है बहुत कम समय में मोटी रकम जो आती है लेकिन इसी जमीन के खरीद-फरोख्त के काले कारोबार में हर जमीन माफिया अपनी दबिस दिखाना चाहता है इसी को लेकर देवघर में खूनी खेल होता रहता है नतीजा बड़े जमीन के कारोबारी छोटे दलालों को अपनी हनक दिखाना चाहता हैं जिसके चलते उन्हें मौत के घाट भी उतारा जाता है दरअसल देवघर ठाड़ी दुलमपुर के मोहल्ले में ब्रह्मदेव तुरी अपने परिवार के साथ रहता था जमीन के कारोबार से जुड़ा था 10 वर्षों से ,इन दस वर्षों में वह अच्छी खासी संपत्ति भी अर्जित कर ली थी लेकिन उसके संपत्ति पर किसी की काली नजर लग गई बुधवार की सुबह तकरीबन 6:00 बजे तीन युवक उसके घर पर आए कुछ पूछे बिना उसके ऊपर गोली चला दी जिससे उसकी मौत घटनास्थल पर ही हो गई अस्पताल जाने जाने के क्रम मौत हो गई
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*इसी 10 कट्ठा जमीन के लिए गई ब्रह्मदेव दूरी की हत्या*
ठाड़ी दुलमपुर के इस गांव में 200 मीटर की दूरी पर यह जमीन कुल 10 कट्ठे की जमीन है इसी पर पिछले 10 दिनों से ब्रह्मदेव दूरी के पास कुछ लोग आया करते थे और खरीददार अपने बुआ की बात करते थे मेरी फुआ इस जमीन को लेगी कुछ इस तरह की बात हुई थी कुछ कम दर्द कर दीजिए और मेरी फुआ को दे दीजिए इस जमीन की कीमत आठ लाख रूपए कट्ठे रखी गई थी इस पर बात नहीं बनी गांव वाले की माने तो वह युवक सरवा का था पिछले 10 दिनों से आ रहा था इसी पर बात नहीं बन रही थी लेकिन दरअसल उस युवक को दर पसंद नहीं आ रहा था
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*निर्माणाधीन मकान में इसी जगह पर ब्रह्मदेव परी को मारा**
पिता के घर के बगल में बना रहा था नया घर गांव वाले की मानें तो पिता नरेश दूरी एवं बेटा ब्रह्मदेव दूरी मिलकर जमीन का कारोबार तकरीबन 10 वर्षों से कर रहा था लेकिन पिता और बेटों में कुछ मनमुटाव चल रहा था कुछ दिनों से तो ब्रह्मदेव पूरे ने अपना नया कारोबार करने का मन बनाया हालांकि इस आलीशान मकान को देखकर यही लगता है कि नरेश दूरी ने अच्छा पैसा भी कमाया था आपको बता दें कि नरेश तुरी अपने छोटे बेटे को लेकर घर में रह रहा है अपने बड़े बेटे को घर से बाहर निकाल दिया था
*समाजसेवी था ब्रह्मदेव दूरी*
इस घटना से पूरा गांव गमगीन माहौल में डूब चुका है इस लफ्ज़ों में ब्रह्मदेव दूरी गरीबों की मदद किया करते थे कई बार मुफ्त में चावल राशन या फिर किसी प्रकार की जरूरत गांव वालों को अगर होती थी तो वह बेफिक्र ब्रह्मदेव पुरी के पास आता था और ब्रह्मदेव तेरी खुशी से उन गांव वालों की मदद भी किया करता था किसी गाड़ी का पेट्रोल खत्म हो जाए उसकी गाड़ी में पेट्रोल नहीं है उसे उसकी पैसे भी देता था इससे पता चलता है कि गांव वाले से उसकी कोई दुश्मनी नहीं हो सकती है
लेकिन ब्रह्मदेव तेरी को क्या पता था कि बुधवार की सूर्य की किरण उसकी जिंदगी की आखरी किरण साबित होगी हालांकि पुलिस सभी बिंदुओं पर छानबीन कर रही है ।
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