शिक्षकों की बकाया अनुदान राशि एकमुश्त विमुक्त करने की सरकार से मांग--प्रो रणजीत

शिक्षकों की बकाया अनुदान राशि एकमुश्त विमुक्त करने की सरकार से मांग--प्रो रणजीत


(शहाबुद्दीन अहमद/ चम्पारण नीति) 
बेतिया। जयप्रकाश विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर शिक्षक संघ, छपरा के सचिव ,सम्बद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघर्ष समिति के संरक्षक तथा सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लोकप्रिय एवम जुझारू प्रत्याशी ,प्रो रणजीत कुमार ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ईमेल  भेजकर वित्तरहित शिक्षण संस्थानों का वर्षों से बकाया अनुदान राशि एकमुश्त विमुक्त करने हेतु मुख्यमंत्री से अविलंब सार्थक हस्तक्षेप करने की मांग की है।प्रो कुमार ने कहा है कि राज्य के सम्बद्ध महाविद्यालयों का पिछले 9 साल से अनुदान बकाया है जबकि वित्तरहित इंटर कॉलेजों व माध्यमिक विद्यालयों को भी शैक्षणिक सत्र2013-14 के बाद से अनुदान राशि विमुक्त नहीं किया गया है।सरकार ने इन शिक्षण संस्थानों के अनुदान हेतु क्रमशः 630 एवम 624 करोड़ रुपए आबंटित भी कर दिया था, लेकिन किस कारणवश, आज तक उक्त राशि, वित्तरहित शिक्षण संस्थानों को विमुक्त नहीं किया गया है,अब शिक्षा विभाग एक नया आदेश जारी कर कि
अनुदान विमुक्त करने से पहले संबंधित शिक्षण संस्थानों की  इंफ्रास्ट्रक्चर, भवन ,कमरा की संख्या, छात्रों की वास्तविक उपस्थिति, विषय की पढ़ाई की अनुमति, निर्धारित सीमा के अंदर छात्रों का नामांकन आदि का पहले जांच पड़ताल की जाएगी, जांच के क्रम में अगर सब कुछ ठीक-ठाक  पाया गया  तो  अनुदान विमुक्त किया जाएगा।शिक्षा विभाग के इस तरह के निर्णय से स्पष्ट होता है कि जान- बुझकर वर्षो से बकाया अनुदान राशि को सरकार अटकाना, लटकाना एवम भटकाना चाहतीहै।सरकार का इस तरह के रवैया से शिक्षा एवम शिक्षकों के प्रति उनके नकारात्मक सोच को दर्शाता है।वर्षो से अनुदान नहीं मिलने की वजह से वित्तरहित शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षक एवम कर्मचारी पहले से ही आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे हैं, ऊपर से शिक्षा विभाग का नया फरमान एक तो करेला दूजे नीम चढ़ी वाली कहावत चरितार्थ हो रही है,इससे पहले सरकार ने प्रत्येक पंचायत में ,मध्य विद्यालय को अपग्रेड कर इंटर  स्तरीय बनाने की घोषणा कर एक तरह से ग्रामीण क्षेत्रों में अवस्थित इन वित्तरहित शिक्षण संस्थानों में तालाबंदी का इंतजाम कर ही है।सीट बढ़ोतरी को भी वापस ले लिया गया है,कुल मिलाकर सरकार ऐसा इंतजाम कर रही है कि बिहार में वित्तरहित शिक्षण संस्थान बंद हो जाए।सरकार के इस रवैये से इन शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों एवम कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय हो गया है।इसी तरह जयप्रकाश विश्वविद्यालय के तहत आने वाले 11 अनुदानित डिग्री कॉलेज के सैकड़ों शिक्षकों का अभी तक सेवा नियमितीकरण भी नहीं हुआ है,इनमें अधिकांश शिक्षक दो दशक से अधिक समय से शिक्षण का कार्य कर रहे हैं।पटना उच्च न्यायालय का फैसला भी इन शिक्षकों के पक्ष में है,इसके बावजूद सेवा नियमितीकरण का मसला नौकरशाही एवम लालफीताशाही के मकड़जाल में उलझकर रह गया है।प्रो कुमार ने इन मुद्दों पर मुख्यमंत्री से अविलंब हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहा है कि अनुदानित शिक्षण संस्थानों का बकाया अनुदान अविलंब एकमुश्त विमुक्त किया जाए ,वित्तरहित इंटर एवम डिग्री कॉलेजों को भी वेतनमान दिया जाए तथा सम्बद्ध उच्च विद्यालयों का अधिग्रहण कर वित्तरहित शिक्षा नीति को समाप्त किया जाय।डिग्री कॉलेजों के जिन शिक्षकों का अबतक सेवा नियमितीकरण नहीं हुआ है, उनकी सेवा नियमितीकरण हेतु कुलपति को निर्देश जारी किया जाए।गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की दिशा में सरकार का यह सकारात्मक एवम निर्णायक कदम होगा।