जीतन ,देवघर । भगवान वेदव्यास के जन्म दिवस आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूजन दिवस या गुरु पूर्णिमा के रूप में आयोजित किया जाता है| गुरु शाश्वत होते हैं और उनकी पूजा नित्य प्रतिदिन किसी न किसी रूप में होती है| मनुष्य के जीवन काल में विभिन्न स्तर पर गुरु का प्रभाव पड़ता है| हमारे प्रथम गुरु माता पिता होते हैं जो जीवन पर्यंत हमारी उत्तरोत्तर सफलता की कामना करते रहते हैं| शास्त्रों में गुरु को देवता से भी ऊंचा स्थान दिया गया है| गुरु शिष्य संबंध निश्चल नित्य निरंतर होता है| गुरु ही हमें देवत्व का ज्ञान कराते हैं देवों की पहचान कराते हैं| शिष्य भी विनम्र होकर निरंतर गुरु का प्रसाद पाते रहते हैं| उपरोक्त बातें आचार्य श्री सुदर्शन जी महाराज ने वेब नायर के द्वारा गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आशीर्वचन देते हुए कहा| स्थानीय देवघर सेंट्रल स्कूल हिरना में गुरु पूजन का आयोजन धूमधाम से किया गया जिसमें शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मी ने उत्साह पूर्वक अपनी उपस्थिति दर्ज कराई| सर्वप्रथम वृहद गुरु पूजन व हवन का आयोजन किया गया| तत्पश्चात आचार्य श्री ने सभी शिष्यों को वेब नायर के द्वारा आशीर्वचन प्रदान किया तथा गुरु दक्षिणा के रूप में अपने भक्तों से यह मांग किया कि समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने में तथा बच्चों को संपूर्ण मानव बनाने में हमेशा निष्ठा पूर्वक कार्य करते रहें| इस अवसर पर विद्यालय परिसर में शिक्षकों के द्वारा फुल तथा फल के पौधों को भी लगाया गया| अंत में सभी ने यह संकल्प लिया कि हम सत्य और निष्ठा के मार्ग पर चलते हुए आचार्य श्री के शिक्षण विधि से बच्चों को सुसंस्कृत ज्ञानवान व समर्थ वन बनाने का सतत प्रयास करते रहेंगे|

