आमोद दुबे व्यूरो की रिपोर्ट
बांका:श्रावणी मेले की सारी उम्मीद छोड़ने के बाद प्रखंड के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में खासकर कांवरिया पथ के किनारे वाले सभी गांव में किसान अब पूरे तन मन धन से खेती करने में लग गए हैं । महिला और पुरुष अब खेतों में उतरकर अच्छी पैदावार के लिए प्रयासरत हैं। कांवरिया पथ के किनारे कई दर्जन गांव के लोग सावन से पहले ही खेती को निपटाने के बाद कांवरिया पथ पर अपने धंधे में लग जाते थे ।लेकिन सावन की आमदनी पूरी तरह बंद हो जाने के कारण खेती के लिए लोग खेतों में उतर चुके हैं । मान्यता है की एक माह की कमाई से साल भर का खर्चा सावन से आ जाता था। इस बर्ष मक्का की खेती भी नहीं के बराबर हो रही है। क्योंकि कांवरिया पथ पर ही इसकी सबसे अधिक खपत होती थी ।लेकिन कांवरिया मेला नहीं लगने से इसकी खेती की जगह अब धान की खेती की जा रही है।
इस बर्ष श्रावणी मेला नही लगने से मक्का की खेती करने वाले किसान के समक्ष मक्का बिक्री की विकट समस्या उतपन्न होगी।कांवरिया पथ में मक्का की सबसे अधिक।बिक्री गोड़ियारी नदी,आसाम धर्मशाला,इनारावरन इत्यादि जगहों पर खूब होती थी।जिससे किसान की आमदनी बढ़ जाती थी।इस अब किसानों को अपना मक्का बाजारों में ही बेचना पड़ेगा।
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