जब-जब गलत हुआ धरती पर
आई माता तुम बारम्बार
फिर से कष्ट एक आन पड़ा है
आ जाओ फिर से ईक बार
माता करो जग का उद्धार ।
देखो मानव फिर ग्रसित हुआ है,
बहुत ही हो रहा अत्याचार
देखो तेजी से पाप हो रहा है
एक दिनों में लाखों बार
माता करो जग का उद्धार ।
जब मानवता पर दुख बरसा है
कष्ट हरा तूने हर बार
फिर से माते कष्ट हरो और
आशीष तुम देना अपरंपार
माता करो जग का उद्धार ।
- सौरभ कुमार ठाकुर (बालकवि एवं लेखक)
मुजफ्फरपुर, बिहार


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