माँ

माँ


जब-जब गलत हुआ धरती पर
आई माता तुम बारम्बार 
फिर से कष्ट एक आन पड़ा है 
आ जाओ फिर से ईक बार 
माता करो जग का उद्धार ।

देखो मानव फिर ग्रसित हुआ है,
बहुत ही हो रहा अत्याचार
देखो तेजी से पाप हो रहा है
एक दिनों में लाखों बार 
माता करो जग का उद्धार ।

जब मानवता पर दुख बरसा है 
कष्ट हरा तूने हर बार 
फिर से माते कष्ट हरो और 
आशीष तुम देना अपरंपार 
माता करो जग का उद्धार ।



- सौरभ कुमार ठाकुर (बालकवि एवं लेखक)
मुजफ्फरपुर, बिहार 

Post a Comment

0 Comments