बांका(रजौन):बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर के निर्देशन में कृषि विज्ञान केंद्र बांका के तत्वावधान में संचालित कार्यक्रम जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के तहत अंगीकृत गांव उपरामा भूसिया,कठौन,लीलातरी,बसुहारा सहित अन्य गांव से चयनित प्रगतिशील 50 किसानों का जत्था दो दिवसीय परिभ्रमण सह प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया,पूसा,समस्तीपुर के लिए रवाना गुरुवार की देर शाम किया गया।जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम बोरलॉग इंस्टीट्यूट ऑफ साउथ एशिया के कृषि पद्धति के तर्ज पर पूरे बिहार के 38 जिलों के चयनित गांवों में संचालित किया जा रहा है।जिसके तहत चयनित गांव के किसान बीसा के कृषि पद्धति को अपना रहे हैं तथा इन चयनित गांवों में संबंधित जिले के अंतर्गत अवस्थित प्रखंड से चुनिंदा किसानों को तकनीकी का अवलोकन एवं परिभ्रमण कराया जाता है।ताकि इस कृषि पद्धति का सरलता से प्रचार-प्रसार किया जा सके।इस दो दिवसीय परिभ्रमण प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत किसानों को बीसा के अलावे राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय पूसा का परिभ्रमण तथा आसपास के किसानों के कृषि पद्धति से रूबरू कराया जाएगा।इस मौके पर कृषि विज्ञान केंद्र बांका के मृदा वैज्ञानिक संजय मंडल ने बताया कि बीसा फार्म संसाधन संरक्षण तकनीक का एक बेहतर मॉडल है। वहां पर किसानों को प्रशिक्षण एवं परिभ्रमण के लिए भेजा जाता है ।शस्य वैज्ञानिक डॉ.रघुवर साहू ने बताया कि इस कार्यक्रम के द्वारा प्रशिक्षु किसान स्वयं जागरूक होंते हुए आसपास के किसानों को जागरुक करने का कार्य करेंगे ।इस अवसर पर संस्थान के प्रधान सह बरीय वैज्ञानिक डॉ.मुनेश्वर प्रसाद ने कहा कि जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण अंग है।इसे चरणबद्ध तरीके से जारी रखा जाएगा।इस टीम का नेतृत्व करने वालों में से उपरामा गांव से दिलीप चौधरी भूसिया से शंभू नाथ वर्मा,कठौन अभिषेक कुमार,लीलातरी से सुजीत राव तथा पूरे टीम का मार्ग दर्शन कृषि विज्ञान केंद्र बांका के इंजीनियर डॉक्टर मनीष कुमार कर रहे थे।
रिपोर्ट कुमुद रंजन राव

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