बांका (रजौन):राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे जल जीवन हरियाली कार्यक्रम के तहत बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर के निर्देशन में कृषि विज्ञान केंद्र बांका के तत्वावधान में जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम का शुभारंभ 20 नवंबर 2019 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा राज्य के आठ जिला में से बांका को भी शामिल किया गया था।इस प्रोजेक्ट की अपार सफलता के बाद इस वर्ष 14 दिसंबर को राज्य के सभी शेष 30 जिलों में भी लागू कर दिया गया। जिसके तहत रजौन प्रखंड के उपरामा,भूसिया,कठौन, लीलातरी,बसवारा अन्य गांव चयनित है।कार्यक्रम पूसा स्थित बोरलॉग इंस्टीट्यूट ऑफ साउथ एशिया कृषि पद्धति की तर्ज पर इन गांवों में संचालित किया जा रहा है।पहले किसानों को परिभ्रमण एवं प्रशिक्षण के लिए पूसा ले जाया जाता था। जिसमें सीमित संख्या में किसान इसका लाभ ले पाते थे।किंतु अब अधिक से अधिक किसानों को इस तकनीक प्रत्यक्षण एवं प्रदर्शन का लाभ दिलाने से संबंधित जिले के अन्य प्रखंड के किसानों को प्रोजेक्ट के तहत अंगीकृत गांव में लाया जा रहा है। चरणबद्ध तरीके से सभी प्रखंड से प्रगतिशील और जागरूक किसानों को इस तकनीक का साक्षात प्रदर्शन कराया जाएगा।सोमवार को जिले के चांदन प्रखंड के चयनित 45 प्रगतिशील किसानों को लाया गया। इस कार्यक्रम के तहत आच्छादित हैप्पी सीडर एवं जीरो टिलेज तकनीक से लगाए गए गेहूं,चना,मसूर,सरसों,मक्का आदि फसलों का आंखों देखा नजारा दिखाया व फायदे को बताया गया। इस इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र बांका के वरीय वेेज्ञानिक मुनेश्वर प्रसाद, एग्रोनॉमिस्ट डां.रघुवर साहू,ई. शोध सहायक इंजीनियर मनीष कुमार,कृषि विज्ञान केंद्र बांका में बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर सेे आए हुए छात्र भी मौजूद थे।इस अवसर पर डॉ मुनेश्वर प्रसाद ने यह बताया कि यह संसाधन- संरक्षण तकनीक की महत्ता को प्रदर्शित करता है। डॉ रघुवर साहू ने इस इन तकनीक को किसानों के बीच अपनाए जाने की जरूरत पर बल दिया।कृषि अभियंता मनीष कुमार ने बताया कि कृषि में आज आधुनिक कृषि यंत्रों की आवश्यकता है।साथ ही कृषि विज्ञान केंद्र राजू कुमार भी मौजूद थे।इस अवसर पर आए हुए किसानों ने तकनीकी सराहना तथा यह एहसास किया कि यह तकनीक कृषि में कम लागत,कम मेहनत और टिकाऊ खेती में अग्रणी है।प्रोजेक्ट के तहत लेजर लैंड लेवलर से समतलीकरण किए गए खेत में आच्छादित फसलों को देखकर उत्साहित हुए।इसे कृषि के लिए वरदान की संज्ञा दी।इस अवसर पर आए हुए किसानों ने असंतोष व्यक्त किया कि मशीनीकरण के दौर में यंत्रों की आवश्यकता है जो काफी खर्चीली है।जिसे किसान खरीदने में असमर्थ है।वहीं दूसरी तरफ सरकार द्वारा इस वर्ष से कई कृषि यंत्रों पर सब्सिडी का प्रावधान खत्म कर दिए जाने से नाराजगी जताई।सरकार से अन्य कृषि यंत्रों पर सब्सिडी लागू किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर उपस्थित किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र के पदाधिकारियों एवं उपरामा गांव के प्रगतिशील किसान रुपेश चौधरी ने संबोधित किया।


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