शाहबुद्दीन अहमद/बेतिया।
चम्पारन साहित्य संस्थान, बेतिया के तत्वावधान में एम.जे.के. कॉलेज, बेतिया के कॉन्फ्रेंस हॉल में , पुस्तक विमोचन -सह- कवि-सम्मेलन का आयोजन हुआ। कार्यक्रम के प्रथम सत्र के अध्यक्ष, कॉलेज प्राचार्य प्रो. (डॉ.) सुरेन्द्र प्रसाद केसरी, मुख्य अतिथि ,महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के हिन्दी विभाग के, डॉ. अंजनी कुमार श्रीवास्तव, विशिष्ट अतिथि, एम.जे.के. कॉलेज के भूतपूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. परमेश्वर भक्त, संस्थान के निदेशक मंडल सदस्य ,पं. चतुर्भुज मिश्र ने संयुक्त रुप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया , संस्थान के संयोजक ,दिवाकर राय की पुस्तक (ऐतिहासिक नाटक) 'दिग्विजयी सन्यासी' का विमोचन किया। मुख्य अतिथि, डॉ. सिन्हा ने कहा कि भारत के स्वत्व की बोध कराती सहज, शुद्ध व इतिहास के साथ न्याय करती हुई ऐतिहासिक नाट्यकृति है, दिग्विजयी सन्यासी। पुस्तक पर ,प्रो. केसरी, डॉ. भक्त, डॉ. रवीन्द्र शाहाबादी, अवधेश कुमार वर्मा ने अपना विचार प्रकट किया। स्वागत भाषण, संयोजक दिवाकर राय ने किया।
द्वितीय सत्र ,कवि-सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे पं. व्रतराज दूबे 'विकल' ने पढ़ा कि, जिनगी जसन है मनावल करीं, जिनगी रसम ह निभावल करीं, जिनगी पोथी ह पढ़े वाला, जिनगी गीत ह गावल करीं। दूसरे सत्र में अरुण गोपाल, सुरेश गुप्त, जयकिशोर जय, जगतभूषण राज, चन्द्रिका राम, अखिलेश्वर मिश्र, उषा दूबे, अवधेश कुमार वर्मा, ललन पाण्डेय लहरी, श्याम कुमार, नवल प्रसाद, राजीव रंजन झा, रामानंद शुक्ल, कृष्णमोहन हिन्दू, श्याम कुमार, शालिनी रंजन, अतुल आजाद, अनिरुद्ध राय, मुनीन्द्र कुमार मिश्र, बिनोद साह, प्रशांत सौरभ के साथ युवा व नवोदित रचनाकार विभांक धर मिश्र, बादल मिश्र, तुषार धर द्विवेदी, शमी वर्णवाल, अनुराधा कुमारी, अनमोल रत्न, सुषमा कुमारी आदि ने अपनी प्रस्तुति से कार्यक्रम को ऊँचाई प्रदान की। दोनों सत्रों का संचालन ,संस्थान के सह-संयोजक व प्रवक्ता डॉ. जगमोहन कुमार ने किया।


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