बांका (चांदन):सरकार द्वारा लगातार मनरेगा मजदूर को काम देने की बात की जा रही है। वही चांदन प्रखंड में पंचायत प्रतिनिधियों के मनमानी के कारण जहां गरीब मनरेगा मजदूर बेहाल है वही धनी औऱ कागजी मनरेगा मजदूर खुशहाल हो रहे है।सरकारी नियम को ताख पर रख कर प्रखंड में ऐसे- ऐसे मनरेगा मजदूर है जिसे अपने द्वारा किये गए काम या योजना स्थल की भी कोई जानकारी नही है।पर उनके खाता में मजदूरी की राशि जरूर आ गयी है। वेसे बैंक खाते की थोड़ी राशि ही उसके खाते में रहती है शेष वापस पंचायत प्रतिनिधि के खाते में वापस चला जाता है।इसी कारण पंचायत प्रतिनिधि के आवास पर बड़ी संख्या में जॉब कार्ड भी रखा जाता है।चांदन बाजार के सभी दुकानदार वार्ड सदस्य सहित कई प्रतिष्ठित लोग भी बिना कोई काम के मजदूरी पा रहा है।जिसमे मुख्य रूप से अजय वर्णवाल,कैलाश वर्णवाल,बमबम वर्णवाल जहां इलेट्रॉनिक की दुकान चलाता है।वही नन्दकिशोर केशरी,प्रदीप वर्णवाल,पवन वर्णवाल,दुकानदार जबकि शिवनन्दन मंड़ल वार्ड सदस्य भी है।कई ऐसे दुकानदार भी है जिसकी पत्नी भी मनरेगा मजदूरी पा रही है। जबकि रामदेव मंड़ल, धीरज रमानी, संजय साह,निरंजन वर्णवाल,रंजन बाजपेयी,इतना ही नही पाण्डेयडीह, पारडीह,मंड़ल टोला मिस्त्री टोला सहित कई ऐसे परिवार भी है। जहां मजदूरी करने वाले के परिवार में सरकारी पेंशन प्राप्त होता है। बताया जाता है कि प्रत्येक भुगतान पर 200 से 300 रु खाता धारक को मिलता है।शेष राशि पंचायत प्रतिनिधि को वापस करनी पड़ती है।जिसके द्वारा राशि देने में आनाकानी की जाती है उसके खाते में दुबारा राशि नही भेजी जाती है। जबकि योजना का अधिकतर काम जेसीबी से कराया जाता है।जिसकी जानकारी सभी पदाधिकारियों को भी होती है। इस सम्बंध में पूछने पर प्रमुख रवीश कुमार और चांदन मुखिया छोटन मण्डल ने कहा कि बिना काम के किसी भी मजदूर का भुगतान नही होता है।

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