अंगिका के लिए भाषा कोड निर्गत करने को उठने लगी आवाज

अंगिका के लिए भाषा कोड निर्गत करने को उठने लगी आवाज

रजौन, बांका : केंद्र सरकार के जनगणना कार्यालय से जारी मातृ भाषाओं के कोड की सूची में अंगिका को शामिल नहीं करने का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। स्कूल कॉलेज राजनीतिक दल सहित साहित्यकारों ने भी आवाज बुलंद करना प्रारंभ कर दिया है। मंगलवार को अखिल भारतीय अंगिका महासभा के बैनर तले  मंगलवार को पुनसिया बाजार स्थित डॉ. अनिरुद्ध प्रसाद विमल के आवास पर आयोजित की गई। अपने संबोधन में डॉ. विमल ने कहा की अंगिका के लिए भाषा का कोड निर्गत नहीं करना अंगिका भाषा की प्रसंगिकता और पहचान के साथ अंग जनपद की भावनाओं पर कुठारधात के साथ साथ खिलवाड़ है। अंगिका भाषा बिहार के अंग महाजनपदों की 5 से 6 करोड़ आबादी में बोली जाने वाली चर्चित एवं लोकप्रिय भाषा है, साथ ही इसकी विधाओं मे प्रकाशित हजारों हजार पुस्तकों से भरी पूरी लोकप्रिय मातृभाषा है। जनगणना कार्यालय भारत सरकार से प्रकाशित देश की 277 मातृ भाषाओं की सूची कोड में अंगिका का स्थान नहीं देख कर  आहत हैं। वही अश्वनी पंडित ने कहा कि यह षड्यंत्र हमारी अस्मिता के खिलाफ है। अंगिका की उपेक्षा हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। बैठक में प्रोफेसर डॉ. सुरेश बिंद, खुशीलाल मंजर, हृदय नारायण यादव, जयप्रकाश गुप्ता, सियाराम पंडित, कुमार संभव, अनुप कुमार, प्रवीण कुमार यादव सहित अन्य ने आगे की रणनीति पर चर्चा की गई।

रिपोर्ट: केआर राव 

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