बांका:बर्ष 2020 के कोरोना काल से पूर्व बांका जिले के चांदन के पाण्डेयडीह निवासी धीरेंद्र पांडेय पाण्डेयडीह निवासी सब्जी की खेती कर अपना और अपने पूरा परिवार का पालन पोषण किया करता था। लेकिन कोरोना का रूप विकराल होते होते उसके सब्जी का व्यापार पूरी तरह ठप पड़ गया। उसके बाद उनके समक्ष बेरोजगारी की स्थिति काफी बढ़ गई औऱ सारा परिवार आर्थिक तंगी का शिकार हो गया। इसी बीच उसे बत्तख पालन की जानकारी मिली और कोरोना की रफ्तार कम होते देख उनके द्वारा बत्तख पालन के रूप में एक नया व्यवसाय शुरू कर दिया गया। धीरेंद्र पांडेय द्वारा अपने ही निजी जमीन पर पोखर बनवा कर मछली पालन के साथ-साथ बतख पालन का व्यवसाय भी शुरू किया गया। इस दौरान उनका व्यवसाय पूरी तरह ठीक चल पड़ा और आज उनकी कमाई अच्छी हो रही है ।पूरा परिवार उसी बत्तख पालन से चल रहा है।
उड़ीसा से लाते है बत्तख--
धीरेंद्र पांडे ने बताया कि वह उड़ीसा से बत्तख लाते हैं। जिसके पालन पोषण में उन्हें काफी मशक्कत के साथ कर्ज लेकर देखभाल करनी पड़ती है। एक बत्तख की कीमत 250 रुपैया होता है। जबकि लाने तक में उसे 350 रुपैया हो जाता है। पालन पोषण के बाद एक बत्तख की बिक्री 500 से 600 में होती है। इतना ही नहीं बत्तख के अंडे भी 10 पीस आसानी से बिक जाती है। इसके लिए बाहर के व्यापारी भी आते हैं।
झोपड़ी में चल रहा है व्यवसाय-
इन दिनों धीरेंद्र पांडेय के पास एक झोपड़ी नुमा मकान में 300 की संख्या में छोटे-छोटे बत्तख हैं। जिसकी देखरेख वह खुद करता है। धीरेंद्र बताता है कि इसी बत्तख के सहारे उनकी आमदनी अच्छी हो रही है। अब वह खुद आत्मनिर्भर हो चुके हैं। और अगल-बगल के बेरोजगार युवकों को भी इस धंधे में लाने का प्रयास कर रहे हैं। ताकि अन्य बेरोजगार युवक भी अपने पैरों पर खड़ा हो सके।
सरकारी सहायता का भी है इंतजार
धीरेंद्र पांडेय का कहना है कि सरकार स्वरोजगार के लिए पूंजी और प्रशिक्षण की बात करती है ।लेकिन करीब डेढ़ साल से वह बत्तख पालन का यह धंधा कर रहा है। लेकिन आज तक उसके इस व्यवसाय को देखने औऱ उसके मनोबल को बढाने तक कोई नही आया। अगर उन्हें सरकारी ऋण के साथ समुचित प्रशिक्षण मिल जाय तो वे इस धंधे को और भी आगे ले जाएंगे। साथ ही साथ अपने क्षेत्र के अगल-बगल के युवाओं को भी इस धधे की ओर प्रेरित करेंगे।
0 Comments
आप सभी हमें अपना कॉमेंट / संदेश भेज सकते हैं...