बांका के कैथा की धरती से महकी कतरनी धान की सुगंध

बांका के कैथा की धरती से महकी कतरनी धान की सुगंध

रजौन, बांका : आत्मा तथा कृषि विज्ञान केन्द्र बांका के वैज्ञानिक तथा पदाधिकारियों के निरन्तर प्रयास से बांका जिले की धरती पर कतरनी धान की खोई हुई ख्याति पुनः वापस लौटती नजर आ रही है। प्रत्यक्ष प्रमाण के तौर पर इसकी एक झलक मंगलवार को कैथा गांव में देखने को मिली। बता दें कि मकर संक्राति त्योहार को लेकर प्रतिवर्ष कतरनी चूड़ा की मांग काफी अधिक रहती है। इस क्रम में उत्तर प्रदेश राज्य के प्रयागराज से आई कृषि से इकोनॉमिक्स में पोस्ट ग्रेजुएट की मिमांसा राज ने कैथा गांव जाकर सभी कतरनी उत्पादक किसानों से व्यक्तिगत रूप से धान उत्पादन का ब्यौरा लिया। जिसमें किसानों द्वारा कतरनी के उत्पादन से सम्बंधित मुनाफा में हो रहे उतार चढ़ाव आदि का पता चल सके और इसी के आधार पर किसानों को और अधिक मुनाफा के लिए नई कार्य योजना को बनाकर दी जा सके। इसके साथ ही आत्मा के सहायक तकनीकि प्रबंधक रंजन कुमार ने बताया कि 'एक जिला एक उत्पाद' (One District One Product) के तहत बांका जिला का चयन हुआ है। इस मौके पर विपिन दास, अश्विनी कुमार, रीतलाल सिंह, भगवान सिंह एवं अन्य मौजूद थे।

रिपोर्ट: केआर राव 

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