शिक्षाविद सह नवादा उच्च विद्यालय के पूर्व प्रधानाध्यापक के निधन पर शोक में डूबे नवादा इलाके के लोग

शिक्षाविद सह नवादा उच्च विद्यालय के पूर्व प्रधानाध्यापक के निधन पर शोक में डूबे नवादा इलाके के लोग

रजौन, बांका : नवादा सहायक थाना अंतर्गत सकहारा ग्राम निवासी सह उच्च विद्यालय नवादा के पूर्व प्रधानाध्यापक वारुणी प्रसाद यादव का निधन करीब 83 वर्ष की उम्र में शुक्रवार की मध्यरात्रि पैतृक गांव में हो गई है। उनके निधन की सूचना मिलते ही सकहारा-नवादा इलाके के दर्जनों गांव में शोक की लहर दौड़ पड़ी है। उनका जीवन वृत्त प्रस्तुत करते हुए सकहारा पंचायत के पूर्व मुखिया अरुण कुमार सिंह, पूर्व मुखिया दयाशंकर सिंह एवं उनके परिजनों ने बताया है कि उनका जन्म 8 जनवरी 1939 में हुई थी। प्रारंभिक शिक्षा तत्कालीन व्यवस्था के तहत खानगी पाठशाला में हुई थी। सातवीं तक की पढ़ाई मिडिल स्कूल नवादा में होने के बाद प्रस्तावित उच्च विद्यालय नवादा बाजार में नामांकन करने के साथ 1954 में मैट्रिक पास किए थे। सत्र- 1954-56 मारवाड़ी कॉलेज से आई कॉम करने के बाद 13 मार्च 1956 ईस्वी को उच्च विद्यालय में शिक्षक पद पर पदस्थापित हो गए। शिक्षक रहने के बाद भी वे अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ाते हुए 1961 ईस्वी में बीए तथा 1974 में एमए तक की पढ़ाई किए थे। वारुणी प्रसाद यादव का शिक्षा क्षेत्र के अलावे खेलकूद वाद-विवाद, नाटक, कला प्रदर्शन आदि में काफी रुचि रहती थी। वह 31 जनवरी 1999 ईस्वी में विद्यालय प्रधानाध्यापक के पद से सेवानिवृत्ति के बाद 2002 ईस्वी में भारतीय किसान संघ के नेता परमानंद चांदवाला के संपर्क में आकर गैर राजनीतिक संगठन भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष से लेकर प्रांतीय स्तर तक के किसान नेता के नाम पर जाने जाते रहे। धोरैया जदयू विधानसभा मीडिया प्रभारी सह उपरामा ग्राम निवासी अंजनी कुमार चौधरी ने बताया मेरे दादा स्वर्गीय रामविलास चौधरी, स्वर्गीय मनमोहन चौधरी एवं वारुणी प्रसाद यादव तीन व्यक्ति शिक्षा के शुरुआती दौर में ब्रह्मा, विष्णु, महेश के नाम पर ख्याति प्राप्त करते हुए प्रस्तावित नवादा उच्च विद्यालय के फाउंडर सदस्य के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र को आमूलचूल अलख जगाने का कार्य किया है। जिसे कभी भी नवादा इलाके के शिक्षाविद, प्रबुद्ध जन, विद्वत जन इन तीनों महान शिक्षाविदों को नहीं भूल सकता। प्रस्तावित उच्च विद्यालय की स्थापना काल से लेकर आज तक नवादा उच्च विद्यालय के विद्वान, कड़क, प्रशासनिक क्षमता रखने वाले प्रधानाध्यापक स्वर्गीय रामविलास चौधरी दिव्यांग रहने के बाद भी नवादा इलाके में शिक्षा का जो ज्योति जलाया है उस ज्योति जलाने में वारुणी प्रसाद यादव, मनमोहन चौधरी का अहम भूमिका रहा है। यही कारण है कि नवादा उच्च विद्यालय के तत्कालीन प्रधानाध्यापक स्वर्गीय रामविलास चौधरी दिव्यांग रहने के बाद भी नवादा इलाके से लेकर प्रखंड, जिला, राज्य स्तर पर उस जमाने के शिक्षाविद से लेकर आज तक के शिक्षाविदों के बीच वे 'जारके' के नाम से जाने जाते रहे हैं। वारुणी प्रसाद यादव जीवन के अंतिम क्षण तक गांव, समाज, क्षेत्र, राज्य एवं देश के प्रति समर्पित रहे। उनके निधन पर इंटर स्तरीय उच्च विद्यालय नवादा बाजार के प्रधानाध्यापक सह वारुणी प्रसाद यादव के शिष्य विनोद कुमार, नवादा हाई स्कूल के शिक्षक सह शिष्य दयाशंकर सिंह, नवादा इलाके के सुप्रसिद्ध परमानंद सिंह, भारतीय किसान संघ के प्रांतीय नेता परमानंद चांदवाला, जिला अध्यक्ष विद्याधर सिंह, पूर्व जिला अध्यक्ष शुकदेव प्रसाद राव, पूर्व मुखिया मुरलीधर सिंह, अरुण कुमार सिंह, दिनेश प्रसाद सिंह, राजेश कुमार सिंह, नवादा बाजार प्रखंड बनाओ अभियान समिति के संयोजक रामनारायण चौधरी,मलही गांव के विनय कुमार सिंह,विष्णुपुर गांव के कपिलदेव राव,सिकंदर राव, जयप्रकाश राजपाल ,वरिष्ठ पत्रकार कुमुद रंजन राव आदि ने उनके निधन पर गहरी संवेदना और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की हैं। वह अपने साथ 3 पुत्र में से अखिलेश को छोड़कर निर्मल कुमार, निखिलेश कुमार एवं एक पुत्री सहित भरा पड़ा परिवार छोड़ गए हैं। उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीति रिवाज के अनुसार भागलपुर बरारी स्थित श्मशान घाट में किया जाएगा। उनके अंतिम दर्शन के लिए सकहारा गांव सहित आसपास एवं दूर-दराज से शिष्य सहित अन्य लोग काफी संख्या अंतिम शव यात्रा से लेकर बरारी  घाट तक में साथ चल और पहुंच रहे हैं।

रिपोर्ट:केआर राव 

Post a Comment

0 Comments