रजौन, बांका : बांका जिले के रजौन थानाध्यक्ष बुद्धदेव पासवान को अवैध बालू खनन कारोबार को बढ़ावा देने के मामले में पुलिस कप्तान अरविंद कुमार गुप्ता द्वारा निलंबन करते हुए लाइन हाजिर कर दिया गया है। जबकि रजौन पुलिस इंस्पेक्टर राजेश कुमार को भी रजौन से हटाकर बांका हेड क्वार्टर एलएलटीएफ प्रभारी के रूप में तैनाती की गई है। वहीं रजौन पुलिस इंस्पेक्टर के रूप में बांका एलएलटीएफ प्रभारी अजीत कुमार सिंह की तैनाती की गई है। मालूम हो रजौन थानाध्यक्ष बुद्धदेव पासवान नीरज तिवारी के स्थान पर रजौन थानाध्यक्ष के रूप में 5 दिसंबर 2020 को पदभार ग्रहण किए थे। बीच में 27 जनवरी 2021 से लेकर 31 मार्च 2021 तक प्रशिक्षु पुलिस उपाधीक्षक अविनाश कुमार थानाध्यक्ष के रूप में थे। उनके जाने के बाद दूसरे सत्र में भी 1 अप्रैल 2021 से बुद्धदेव पासवान ही स्वत: थानाध्यक्ष के पद पर आसीन थे। मालूम हो कि बौंसी से अलग कर रजौन को 2019 में पुलिस अंचल का दर्जा दिया गया था। प्रथम पुलिस इंस्पेक्टर की तैनाती तत्कालीन पुलिस कप्तान स्वपना जी मेश्राम ने 1 मार्च 2019 को की थी। बता दें कि प्रथम पुलिस इंस्पेक्टर राजेश कुमार का रजौन में कार्यकाल संतोषजनक एवं बेदाग रहा। वे अच्छे ईमानदार छवि के रूप में अपना छाप छोड़ कर गए हैं। मालूम हो रजौन थाना में करीब एक दशक से जो भी थानाध्यक्ष के रूप में पदस्थापित किए गए हैं, प्रायः वे सभी थानाध्यक्ष बालू के मामले में ही निलंबित होते जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि निवर्तमान थानाध्यक्ष बुद्धदेव पासवान पर बहुत दिन से बालू कारोबारियों से सांठगांठ कर धड़ल्ले से बालू का उठाव, परिचालन, भंडारण किए जाने का आरोप प्रत्यारोप का दौर चलता आ रहा था। मालूम हो 31 जनवरी सोमवार की सुबह बाराहाट थानांतर्गत चपरा-कोल्हथा गांव के बीच अवैध बालू परिचालन के खिलाफ छापेमारी करने गई एसडीपीओ दिनेश चंद्र श्रीवास्तव एवं पुलिसकर्मियों पर बालू माफियाओं द्वारा पथराव एवं मारपीट की घटना घटित हुई थी, जिसमें एसडीपीओ सहित कई पुलिस कर्मी जख्मी हुए थे। थानाध्यक्ष पर लगातार आरोप लगते चला आ रहा था कि थानाध्यक्ष की मिलीभगत एवं मौन स्वीकृति से ही पुनसिया चौक के समीप बालू से लदी दर्जनों वाहनों की लंबी कतार को एक साथ पासिंग करवाया जाता आ रहा था। एसडीपीओ पर हमले प्रकरण में जदयू के समर्पित कार्यकर्ता सुभाष चंद्र राव को एक पुराने बालू मामले में 31 जनवरी की शाम को गिरफ्तार करते हुए 1 फरवरी को न्यायिक हिरासत में जेल भिजवा दिया गया था। इस प्रकरण को लेकर सत्ता पक्ष सहित राजनीतिक दलों के नेताओं, कार्यकर्ताओं, समर्थकों एवं प्रखंड वासियों में थानाध्यक्ष के प्रति काफी नाराजगी और रोष बढ़ता जा रहा था। मालूम हो इसके पूर्व भी थानाध्यक्ष नीरज तिवारी, सुमित कुमार, आशीष कुमार, उमेश प्रसाद, शिव कुमार यादव, परीक्षित पासवान, रामप्रीत, गौतम बुद्ध सहित कई थानाध्यक्ष बालू मामले में नपे जा चुके है। रजौन थानाध्यक्ष का जाना एसडीपीओ के हमले के पहले से ही जाना तय हो गया था। मालूम हो परघड़ी-लकड़ा पंचायत के 9 जीविका समूहों का 10 लाख रुपया से अधिक फर्जी हस्ताक्षर एवं फर्जीवाड़ा तरीके से जीविका सीएम निशी मिश्रा द्वारा गबन कर लिया गया था। इस प्रकरण को लेकर परघड़ी लकड़ा पंचायत की 9 जीविका स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष सचिव एवं कोषाध्यक्ष दर्जनों सदस्य महिलाओं के साथ 20 जनवरी से लेकर 22 जनवरी 2022 तीन दिन तक लगातार थाना का चक्कर काटती रही। थाने में मामला दर्ज कराने को लेकर दर्पण स्वयं सहायता समूह अध्यक्षा सोनम कुमारी, अपने दीपिका बीपीएम संजीव कुमार सिंह के निर्देशन में जीविका एरिया कोऑर्डिनेटर रंजीत कुमार, सीएम अनिता कुमारी आदि द्वारा अर्जुन विनती करने के बाद भी आवेदन लेने के उपरांत वापस कर दिया गया। टालमटोल की नीति से आज तक पंचायत की सैकड़ों जीविका स्वयं सहायता समूह महिलाएं न्याय के लिए दर-दर भटक रही है। थाना से थके हारे स्थिति में मुख्यमंत्री के जनता दरबार में जाने का मन बना लिया है। निलंबित थानाध्यक्ष बुद्धदेव पासवान कार्यकलाप से प्रखंड वासी काफी असंतुष्ट दिख रहे थे। बताया जा रहा है थाने में परवेज नामक प्राइवेट चालक के मनमानी के चलते थाने के लोग परेशान रहते थे। वैसे थाने में अभी भी कई बाहरी लोग डेरा डाले हुए हैं।बुद्धदेव पासवान को जाने से प्रखंड के लोगों में खुशी और गम दोनों देखा जा रहा है।
रिपोर्ट: केआर राव
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