खेती से थके-हारे किसानों के लिए अच्छी खबर : कश्मीरी रेड एप्पल व थाई एप्पल किस्म के बेर की खेती कर बनिए लखपति

खेती से थके-हारे किसानों के लिए अच्छी खबर : कश्मीरी रेड एप्पल व थाई एप्पल किस्म के बेर की खेती कर बनिए लखपति

लरजौन, बांका : जो किसान, खेती से ज्यादा मुनाफा नहीं कमा पा रहे हैं, उन थके हारे किसानों के लिए एक अच्छी खबर है। बांका जिले के रजौन प्रखंड के नवादा-खरौनी पंचायत अंतर्गत दुर्गापुर गांव में डॉक्टर विरेंद्र कुमार सिंह एवं कुंजबिहारी सिंह दो भाइयों ने मिलकर अपने खेतों में उन्नत किस्म के बेर की खेती कर गांव समाज में अन्य किसानों को नई राह दिखाने का काम कर रहे हैं। डॉक्टर विरेंद्र कुमार सिंह ने बताया है कि वो किसान के अलावा होमियोपैथी के चिकित्सक भी हैं। धान की खेती में ज्यादा आमदनी नहीं देख उनके मन में वैकल्पिक खेती का विचार आया और यूट्यूब पर जानकारी प्राप्त की। इसके बाद बंगाल से लाकर उन्नत किस्म के बेर के पेड़ को अपने खेतों में लगाया। किसान विरेंद्र सिंह द्वारा कश्मीरी, रेड एप्पल, थाई एप्पल सहित अन्य उन्नत किस्म के बेर की खेती की जा रही है। डॉक्टर वीरेंद्र ने बताया कि फिलहाल थाई एप्पल बेर को बाजार में सप्लाई की जा रही हैं। वहीं रेड एप्पल बेर की मांग अधिक है लेकिन इसके पकने में अभी कुछ समय है। बाजार में थाई बेर 80 से सौ रुपए प्रति केजी बेर की बिक्री की जा रही है। बेर की ये किस्म दिखने में कच्चे सेब जैसी होती है, जो स्वाद में कुछ खट्टे-मीठे होने के साथ-साथ काफी स्वादिष्ट होते हैं, लोग इसे किसान का सेब भी कहते हैं। इसमें कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जिसके कारण ग्रामीण हाट-बाजारों के साथ-साथ गांव-घर में इस बेर की काफी मांग हो रही है। वर्ष 2020 में शुरुआती दौर में करीब एक सौ पेड़ से 50 से 60 हजार रुपया मुनाफा प्राप्त हुआ था। इस बार अपने 4 एकड़ जमीन पर करीब 4 हजार पेड़ लगाया गया है। जिससे फल पकने एवं टूटने प्रारम्भ हो चुके हैं और इसे अब हाट बाजारों तक पहुंचाने का कार्य भी शुरू हो चुका है। इस वर्ष करीब 10 से 15 लाख रुपए मुनाफा होने का अनुमान है। ऐसे में खेती से ऊब चुके किसानों के लिए उन्नत किस्म की बेर की खेती यहां वरदान साबित हो रही है। छोटे-मोटे किसान भी जिनके पास कम जमीन हैं वे भी अच्छी आमदनी के लिए इस बेर की खेती कर सकते हैं।

रिपोर्ट:केआर राव 

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