दिव्यांशु राठौर की रिपोर्ट
शंभुगंज (बांका) : मनुष्य में ज्ञान के साथ - साथ प्रेम का भी होना बहुत आवश्यक है। बगैर प्रेम का ज्ञान मनुष्य में अहंकार और घमंड प्रदर्शित करता है।उक्त बातें करसोप में चल रहे श्रीमदभागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के पाचवें दिन कही।कथावाचक ने कृष्ण और उद्धव की कथा के माध्यम से श्रोताओं को बताया कि उद्धव को ज्ञान का काफी घमंड हो गया। एक दिन जब उद्धव भगवान श्रीकृष्ण से मिलने द्वारिका आए तो ज्ञान का बखान करना शुरू कर दिया।तब कृष्ण ने उद्धव को ज्ञान का प्रदर्शन करने गोपियों के पास ब्रज भेज दिया। वहां जब कृष्ण की प्रेमिका राधा सहित अन्य गोपियों से मिले तो उद्धव ने माना कि ज्ञान से कहीं बड़ा प्रेम है। वहां से लौटने के बाद उद्धव ने कृष्ण के पांव पकड़ लिए। बताया कि ज्ञान जीविकोपार्जन का साधन है , लेकिन प्रेम का तो कोई मोल ही नहीं है ।कथा के दूसरे सत्र में कथावाचक ने कंस बध की कथा सुनाकर भक्तों को रोमांचित कर दिया । कथा के बीच - बीच में हो रहे भागवत भजन सुन श्रोता झूमने पर विवश हो रहे हैं। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि गुरूवार को कथा का समापन होगा।


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