भागवतकथा श्रवण मात्र से ही पाप , ताप और संताप होते हैं दूर - कथावाचक नित्यकिशोर पुरोहित

भागवतकथा श्रवण मात्र से ही पाप , ताप और संताप होते हैं दूर - कथावाचक नित्यकिशोर पुरोहित

दिव्यांशु राठौर की रिपोर्ट


शंभुगंज (बांका) : भागवतकथा सुनने से पाप , ताप और संताप दूर हो जाता है। राजा परीक्षित ने सुकदेव मुनि से सात दिनों तक भागवत कथा का श्रवण किया। जिससे राजा को मोक्ष की प्राप्ति हुई।राजा परीक्षित को एक मुनि कुमार ने श्राप दिया कि सात दिनों के अंदर सर्पदंश से मृत्यु होगी।मुनि कुमार के श्राप से राजा विचलित हो उठे , और खुद को सुरक्षित रखने के लिए यत्र - तत्र भटकने लगे। फिर एक दिन एक महर्षि ने राजा को सुकदेव मुनि के समीप भेजा।जहां भागवत कथा सुनते ही राजा को जन्म - मरण से मुक्ति मिल गई ।उक्त बातें वृंदावन से आए कथावाचक नित्यकिशोर ने भागवत कथा के दूसरे दिन सुनाया।उन्होंने कलियुग पर विस्तार से फोकस किया।बताया कि इस युग में मानव लोभ , मोह , माया , मदिरापान के वशिभूत रहेंगे , लेकिन मनुष्य को इस दलदल में जाने से बचना होगा।इसका एक मात्र रास्ता है मनुष्य तर्म करने के साथ भागवत भजन में ध्यान लगाएं ।कथा के बीच - बीच में हो रहे भजन से श्रोता झूमने - नाचने पर विवश हो रहे हैं। कथा की सफलता में बाजारवासी सक्रिय हैं।


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