गुरू के बगैर मानव जीवन सार्थक नहीं - कथावाचक नित्यकिशोर महाराज

गुरू के बगैर मानव जीवन सार्थक नहीं - कथावाचक नित्यकिशोर महाराज

दिव्यांशु राठौर की रिपोर्ट


शंभुगंज (बांका) : मानव जीवन को सार्थ बनाने के लिए गुरू का होना आवश्यक है। गुरू का काम है अवगुणों को हटाकर सदगुणों को भरणा।उक्त बातें वृंदावन के कथावाचक नित्यकिशोर महाराज ने शंभुगंज के करसोप में चल रहे भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन कही। कथा के माध्यम से उन्होंने बताया कि बिना गुरू के भक्ति बेकार है। जिसका गुरू नहीं , उसका जीवन शुरू नहीं।  कथावाचक ने समुद्र मंथन की कथा विस्तार से सुनाया। उन्होंने बताया कि मनुष्य को जब कोई चिंता और परेशानी हो तो उस वक्त घबराना नहीं चाहिए , बल्कि धैर्य के साथ मंथन करना चाहिए। जिस प्रकार देवताओं को समुद्र मंथन करने से अमरत्व की प्राप्ति हुई। उसी प्रकार किसी भी विषम परेशानी आने पर मनुष्य को भी मंथन करना चाहिए।जिसका परिणाम सुखद होगा। कथा के बीच - बीच में हो रहे भागवत भजन से श्रोता झूमने पर विवश हो रहे हैं।आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि कथा की पूर्णाहुति 12 जनवरी को धूमधाम से होगा।


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