दिव्यांशु राठौर की रिपोर्ट
शंभुगंज (बांका) : मोह और माया का जाल मनुष्य के लिए सबसे बड़ा दुखों का कारण है। मानव जीवन अमूल्य है , लेकिन मनुष्य मोह - माया के जंजाल में फसकर बेशकीमती जीवन बर्बाद कर देते हैं। आज मानव भौतिकवाद की चकाचौंध में डूबने लगे हैं , लेकिन उन्बें पता नहीं कि यह क्षणिक है।इसमें जीवन का कोई तथ्य नहीं है। यदि जीवन को सार्थक करना है तो भगवान का भजन करना होगा। उक्त बातें अयोध्या से पधारे प्रेमशरण महाराज ने सातपट्टी कुर्मा में चल रहे श्रीराम कथा के तीसरे दिन कही। उन्होंने बताया कि सिर्फ राम नाम के सुमरिन करने से अनिद्रा और चिंता दूर हो जाता है। कथावाचक ने बताया कि राजा दशरथ के तीन रानियों में कौशल्या भक्ति की , कैकई ज्ञान की और सुमित्रा कर्म का प्रतीक हैं। बताया कि कैकई रूपी ज्ञान के कारण सभी राक्षसों का संहार हुआ , और साधु - संतों की रक्षा हो सकी। कथा के दूसरे सत्र में कथावाचक ने नारद मोह और रामजन्मोत्सव की कथा सुना श्रोताओं को भाव - विभोर कर दिया।कथा की सफलता में कुर्माडीह के सभी ग्रामीण सक्रिय हैं।


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