कड़ाके की धूप में मर रहे मूंग फसल को बचाने में लगे किसान

दिव्यांशु राठौर की रिपोर्ट 


शंभुगंज (बांका) : आग उगल रही धूप से इन दिनों प्रखंड क्षेत्र के किसान मूंग फसल को बचाने में दिन - रात लगे हुए हैं।कड़ाके की धूप के कारण नदी , तालाब पहले ही सूख चुकी है। किसान पंपिंग मशीन द्वारा किसी तरह मर रहे मूंग फसल को जीवित करने में लगे हैं ।बदुआ नदी के किनारे रायपुरा , सहदेवपुर क्षेत्र के कई जगहों पर पानी के कारण अधिकांश किसानों के फसल मर गया।दूसरी ओर फसल पटवन के लिए यदि बोरिंग चलती है तो गांव में पेयजल की समस्या उत्पन्न हो रही है। जिस कारण किसानों की बेचैनी और अधिक बढ़ गई है। कुर्मा के किसान राजाराम सिंह , सोनेलाल सिंह , करसोप के अजय यादव , बिरनौधा के लक्ष्मण मंडल, गुलनी के सदन सिंह सहित अन्य ने बताया कि इस बार सुखाड़ के कारण धान की खेती नहीं के बराबर हुई। इसकी भरपाई के लिए गेंहू फसल उत्पादन के बाद मूंग की खेती किए ।मूंग में अंकुरण आने के साथ कड़ाके की धूप से बीज जलने लगा। बताया कि किसी तरह बोरिंग से खेतों में पानी पटवन करते हैं ।फिर दूसरे दिन खेत सिंचने की नौबत आ जाती है ।इसका मुख्य कारण है कि बदुआ और लोहागढ़ नदी से बालू उत्खनन पर प्रतिबंध रहने के बावजूद भी अंधाधूंध बालू का उठाव हुआ। जिस कारण जल स्तर नीचे जाने से खेतों में पानी टिकना मुश्किल हो गया। बताया कि यदि यह सिलसिला रहा तो खेती खर्च और मेहनत पर पानी फिर जाएगा। प्रखंड कृषि पदाधिकारी चितरंजन चौधरी ने बताया कि इस बार मूंग फसल अक्षादन का लक्ष्य 1839 हेक्टेयर मिला। जिसमें करीब एक हजार हेक्टेयर में मूंग की खेती हुई है। तेज धूप और पछुआ हवा के कारण परेशानी हो रही है।


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