दिव्यांशु राठौर की रिपोर्ट
शंभुगंज (बांका) : प्रखंड क्षेत्र में पानी के लिए चारो तरफ हाहाकार है। नल जल योजना से भी ग्रामीणों की प्यास नहीं बुझ रही है। जिस गांव में योजना धरातल पर नहीं है , वहां ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रखंड मुख्यालय से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर बसा बटेश्वरनगर में पेयजल की कोई सुविधा नहीं है। गांव के बीच पीएचइडी का एक मात्र चापानल है। जिस पर सौ से अधिक की आबादी निर्भर है।इस कारण पानी के लिए चापानल पर सुबह से ही लंवी कतारें लगने लगती है।यह सिलसिला शाम तक चलती है। ग्रामीण निरंजन मंडल , तिलकधारी मंडल , सजनी देवी , चंपा देवी , मीरा देवी , रूबी देवी सहित अन्य ने बताया कि यह बिरनौधा पंचायत का नौ नंबर वार्ड है। जिसमें पांच दर्जन से अधिक घर है। जनप्रतिनिधियों और विभाग की उदासीनता के कारण आज तक इस गांव में पेयजल की व्यवस्था नहीं हो सकी। करीब दो वर्ष पूर्व पंचायतीराज विभाग से जलमीनार का आश्वासन मिला , लेकिन आज तक नहीं हो सका। बताया कि मार्च माह में गांव के सभी चापानल जबाब दे गया। एक मात्र पीएचइडी का चापानल है।जिससे काफी मशक्कत के बाद पीने का पानी नसीब होता है। बताया कि पानी के बगैर मानव के साथ पशु जीवन भी अस्त - व्यस्त है। गांव के समीप गंगटी नदी है , जो पहले सूख चुकी है।मवेशियों के लिए पानी दूर से ढो कर लाना पड़ रहा है। बताया कि अब विभाग के लगातार आश्वासन का समय और ग्रामीणों के धैर्य की सीमा समाप्त हो गई है। यदि अविलंव जलमीनार की व्यवस्था नहीं होती है तो आंदोलन तेज होगा।इस संबंध में बीडीओ प्रभात रंजन ने बताया कि उक्त गांव में एक प्याउ की वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।इसके लिए प्रयासरत हैं।


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