बांका: चार जुलाई से शुरू होने वाले विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले में खासकर च प्रखंड के सबसे लंबे क्षेत्र में अतिक्रमण की समस्या हर वर्ष बढ़ चढ़ कर बोलती है। जिस कारण कांवरिया को आने जाने में और अन्य लोगों को भी छोटे-बड़े वाहन ले जाने में काफी परेशानी होती है। वैसे कांवरिया पथ पर पिछले वर्ष अतिक्रमण से मुक्ति का बहुत प्रयास किया गया था, लेकिन कुछ स्थानीय दुकानदारों और कुछ सुरक्षा कर्मियों की मिलीभगत से इस अतिक्रमण को रोकने की बजाय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका देखी गई। वैसे कई जगहों पर सुरक्षा बल लगाकर कांवरिया के छोटे बड़े वाहन को मुख्य पथ पर जाने से रोकने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन सुरक्षाकर्मी ही लेनदेन के आधार पर वाहनों को कांवरिया पथ में प्रवेश करा देते हैं। जो यत्र तत्र कांवरिया पथ के किनारे खड़ा कर दिया जाता है। जिससे परेशानी बढ़ती है, एक वाहन के आने के बाद दूसरे और दूसरे के बाद तीसरे भी इसी हिसाब से संपूर्ण कांवरिया पथ पर फैल जाता है। इसके अलावा कांवरिया पथ के किनारे लगने वाले दुकान के दुकानदार भी अपनी दुकान को आकर्षक बनाने के लिए पंडाल को कांवरिया पथ की ओर बढ़ जाता हैं। साथ ही उसी दुकानदारों का कुर्सी, बेंच, और चौकी भी पथ के किनारे ही लगाते हैं। जिससे कांवरिया का जत्था उसके दुकानों का ग्राहक बन जाता है। इतना ही नहीं जंगल विभाग के क्षेत्र में भी जो दुकान लगाया जाता है वह भी अतिक्रमण की चपेट में होता है। इनारावरण के बाद से जंगली इलाका शुरू होने और बिहार की सीमा दुम्मा तक जिसमें सुग्गासार, पटनिया ,झाझा, इत्यादि जगहों पर सबसे अधिक अतिक्रमण होता है। जिसे दूर करने के बाद ही कांवरिया पथ पर आवागमन सही हो सकेगा। इस संबंध में आयुक्त सहित जिले के कई अधिकारी के कांवरिया पथ के दौरे के बाद सावन शुरू होने के 15 दिन पहले ही अतिक्रमण हटाने का आदेश दे दिया गया है। लेकिन इस पर अभी कोई शुरुआत नहीं हुई है। इस संबंध में पूछने पर सीओ प्रशांत शांडिल्य बीडीओ राकेश कुमार और थाना अध्यक्ष नसीम खान ने बताया कि इस बर्ष किसी भी परिस्थिति में छोटे-बड़े वाहनों का प्रवेश कांवरिया पथ पर नहीं हो सकेगा। साथ ही साथ जहां भी अतिक्रमण दिखाई देगा उसे हटाते हुए उस पर मामला भी दर्ज किया जाएगा। जिससे कांवरिया पथ पर आने जाने वाले को कोई परेशानी नही होगी। इसके लिए अभी से ही सूची तैयार की जा रही है साथ ही साथ दुकानदारों को भी कांवरिया पथ के किनारे चौकी और कुर्सी लगाने से मना किया जा रहा है। चाहे वह उसकी निजी जमीन ही क्यों न हो। अब देखना है सावन आने के बाद प्रशासन अतिक्रमण हटाने में कितना सफल होता है।


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