अशोक शास्त्री/बेतिया(प.च.) आज जिले कृषि विज्ञान केन्द्र, माधोपुर में एक कार्यक्रम के दौरान किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि :- आम का रेड बैंडेड कैटरपिलर अथवा लाल पट्टी वाला फल छेदक कीट सहित बाग का करें उचित प्रबंधन
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कृषि विज्ञान केन्द्र माधोपुर के उद्यानिकी विशेषज्ञ डॉ धीरु कुमार तिवारी ने आम के बागवानी करने वाले किसानों को बताया कि इस समय पश्चिम चंपारण जिले के आम के बागों में लाल पट्टी वाले फल छेदक कीट जिसे रेड बेंडेड कैटरपिलर भी कहा जाता है, का प्रकोप देखा जा रहा है। इस कीट का लार्वा शुरुआत में आम के फल पर काला धब्बा जैसा दाग डाल देता है। यदि समय पर इसका प्रबंधन नहीं किया गया तो यह फल को छेद कर अंदर ही अंदर पूरा सड़ा देता है। प्रभावित फल सड़कर समय से पहले ही गिर जाता है। इस कीट के अंडे फलों के डंठल पर देखे जा सकते हैं। लगभग 7 से 12 दिनों में अंडों से लार्वा निकलता है तथा 15 से 20 दिनों के अंदर लार्वा फलों को खाने के बाद गुठली में भी छेद करते हैं। इस कीट का लार्वा हल्के पीले रंग का जिस पर गुलाबी रंग की पट्टियां बनी होती है। इसका पूर्ण रूप से विकसित वयस्क कीट धूसर रंग का होता है एवं कीट के पंख हल्के नीले रंग के होते हैं। वयस्क कीट दिन के समय पत्तियों के नीचे रहते हैं।
इसके प्रभावी नियंत्रण हेतु प्रभावित फलों जिन पर काले धब्बे दिखे उसे तोड़कर नष्ट कर दें। आम में मंजर आने के समय से 2 महीने बाद तक 15 दिनों के अंतराल पर नीम के तेल का छिड़काव करें। रासायनिक उपचार हेतु लैम्डासायहैलोथ्रिन 5 ईसी 0.5 से 1.0 मिलीलीटर प्रति एक लीटर पानी अथवा डेल्टामेथ्रीन 28 ईसी 0.5 से 1.0 मिलीलीटर प्रति एक लीटर पानी अथवा इमामेक्टिन बेंजोएट 0.4 ग्राम प्रति एक लीटर पानी में घोलकर अथवा क्लोरैंट्रानिलिप्रोल (10 %)+ लैम्बडासाइहलोथ्रिन (5%) का 0.4 मिली/लीटर पानी छिड़काव 15 दिन के अंतराल पर दो बार करने से इसके उग्रता में कमी आती है। इसके अतिरिक्त मिथाइल यूजिनाल युक्त फेरोमोन ट्रैप के उपयोग से भी इस कीट को नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है।
उन्होंने यह भी बताया कि आम में इस समय बदलते मौसम की वजह से फलों के गिरने की भी समस्या होती है ऐसी स्थिति में छोटे फलों को गिरने से रोकने के लिए प्लानोफिक्स 1 मिली दवा/4.5 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
साथ ही उन्होंने बताया कि आम में फलों के फटने की समस्या भी देखी जाती है तथा बाग के पास ईंट के भट्ठा या मिट्टी बलुई होने से फल का निचला हिस्सा काला पड़ जाता है। इसके लिए बोरेक्स छह ग्राम / लीटर पानी में घोलकर छिड़काव अप्रैल माह के अंत में करें।
कृषि विज्ञान केन्द्र के वरीय वैज्ञानिक डॉ अभिषेक प्रताप सिंह ने बताया कि आम के अधिकांश बागों में अप्रैल तक फलों का जमाव समाप्त हो जाता है और तापमान में वृद्धि दर्ज की जा रही है, ऐसी स्थिति मे बागों में सिंचाई करने से फलों के विकास को बढ़ावा मिल सकता है। इन्होंने बागों में नमी को बनाए रखने हेतु सिंचाई के प्रबंधन के लिए भी किसानों सुझाव दिया। फलों की अच्छी वृद्धि के लिए 10 से 12 दिन में सिंचाई जरूर करें। उन्होंने कहा कि मौसम में गर्मी बढ़ने के साथ आम की फसल में रोग व भुनगा अथवा मधुआ कीट की आशंका बढ़ गई। आम के बगीचे में भुनगा का प्रकोप हो तो थायोमेथाक्जाम 25 डब्लूजी 10 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें। मिज कीट मुलायम पत्तियों, प्ररोह, बौर व नन्हे फलों को भी क्षति पहुंचाता है। इसके लिए क्विनालफास 25 ईसी के 2 मिली या इमीडाक्लोप्रिड के 0.3 मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें। खर्रा रोग से बचाव के लिए सल्फर 2 ग्राम या हेक्साकोनाज़ोल 5 एसएल की 1 मिली मात्रा प्रति ली पानी में छिड़काव कर सकते हैं।
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