आम की बगीचे में फल व्यवसायी
चम्पारणनीति/ बेतिया (प.च.) आम के फलों को नुकसान करने वाली फलमक्खी से आम उत्पादक रहे सावधान, करे उपाय :----------------------------------------------
कृषि विज्ञान केन्द्र माधोपुर के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ अभिषेक प्रताप सिंह ने कहा कि आम लगाने से लेकर पुराने बागों तक कई कीटों का प्रकोप होता है। मैंगोहापर, मीली बग, स्टेंम बोरर, छाल को खाने वाले कीड़े आदि मुख्य हैं, लेकिन फल मक्खी जो कि आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाने वाला कीट है। फल मक्खी (फ्रूट फ्लाई) जिसे डासी मक्खी भी कहते है, आम की फसल को व्यापक तौर पर नुकसान पहुंचाती है। ये फलों को नष्ट करने वाला आम का सबसे सबसे घातक कीटों में से एक है। इसके कारण उत्पादन में औसतन लगभग 27 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है। किसानों को समय से इसका पता लगाने के साथ बचाव और निवारण करने पर ध्यान देना चाहिए नहीं तो इसके प्रोकोप के कारण एक से लेकर 90 प्रतिशत या कभी-कभी सौ-प्रतिशत तक आम को नुकसान हो सकता है।
इसके वयस्क घरेलू मक्खी के बराबर होते है, जिन पर पीले रंग की धारियां होती हैं। जब आम, आधे आकार के फल के रूप में तैयार हो जाते हैं, तो इसकी मादा 300 से ज्यादा अंडे अपने जीवनकाल में देती है। सफेद रंग के बिना पैर वाले इसे मैगट्स फल के गूदे को खाते हैं और फल को सड़ा देते हैं। इसके कारण फल गिरने लगते हैं। इसके लार्वा फिर वापस मिट्टी में चले जाते हैं और फिर से वयस्क के रूप में दिखाई देते हैं। समस्या वाले फल बहुत जल्दी पक सकते हैं और गिर सकते हैं। कृषि विज्ञान केन्द्र माधोपुर के उद्यान विशेषज्ञ डॉ धीरु कुमार तिवारी ने बताया कि अगर किसान समय रहते इसकी पहचान और नियंत्रण कर लें तो इससे होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है। इस कीट का प्रकोप अप्रैल-मई के महीने में अधिक देखने को मिलता है। प्रबंधन के लिए निरंतर जमीन पर गिरे हुए फल मक्खी से संक्रमित फलों को इकट्ठा करें और उन्हें 60 सेंटीमीटर गहरे गड्ढों में इकट्ठा करके और दबा दें। खेत में स्वच्छता बनाए रखें और पेड़ों के आसपास के क्षेत्र से खरपतवार हटा दें। नीम के तेल का 2 से 3 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के अंतराल पर छिड़काव करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, फलों के सेट होने के 45 दिन बाद से डेल्टामेथ्रिन 2.8 ई.सी 1.5 - 2 मिली/ली अथवा फिप्रोनिल 40% + इमिडाक्लोप्रिड 40% 15 लीटर पानी में 6-7 ग्राम अथवा 0.1 प्रतिशत डिमेथोएट का छिड़काव भी प्रभावी है। फल मक्खी की आबादी की निगरानी और प्रबंधन के लिए, प्रति एकड़ 6-8 फल मक्खी फेरोमोन ट्रैप (जाल) रखें। वयस्क फल मक्खियों को पकड़ने के लिए 1 एकड़ के बगीचे में 4 से 6 पीले चिपचिपे ट्रैप (जाल) लगाएं, जो अपने चमकीले रंग के कारण उनकी ओर आकर्षित होते हैं। इस मक्खी को नियंत्रित करने का सबसे कारगर उपाय मिथाइल यूजिनाल युक्त गंध ट्रैप है। इस ट्रैप में एक विशेष प्रकार की टिकिया रखी जाती है जिसमे से मादा फल मक्खी की गंध आती है जिसकी वजह से नर फल मक्खी आकर्षित होकर ट्रैप में फंस जाते है और मर जाते है। नर और मादा फल मक्खी का सम्पर्क न होने से नयी फल मक्खियाँ नहीं तैयार हो पाती है जिसके कारण आम की फसल सुरक्षित हो जाती है। एक हेक्टेयर के लिये 15-20 ट्रैप की आवश्यकता होती है। इन ट्रैप को पेड़ की टहनियों में जमीं से 5-6 फीट की ऊँचाई पर लटका देना चाहिए। यौनगंध ट्रैप को एक माह के अंतर पर बदलना तथा एकत्रित मक्खियों को निकाल कर फेंक देना चाहिए।
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