अनुदान की राशि वितरण को लेकर 6 मई से हड़ताल पर जाएंगे डीएन सिंह महाविद्यालय के शिक्षकेत्तर कर्मी, 5 मई तक का दिया अल्टीमेटम

अनुदान की राशि वितरण को लेकर 6 मई से हड़ताल पर जाएंगे डीएन सिंह महाविद्यालय के शिक्षकेत्तर कर्मी, 5 मई तक का दिया अल्टीमेटम

रजौन, बांका : पूर्व से ही विवादों में घिरे स्थानीय डीएन सिंह कॉलेज एक बार फिर से अनुदान की राशि वितरण नहीं होने पर विवादों में घिर गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार महाविद्यालय द्वारा संबंधन प्राप्त शिक्षकों एवं 9 विषयों की सूची तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय को भेजे जाने के बाद से यहां एक नया विवाद खड़ा हो गया है। शिक्षकों के इस नए विवाद से अलग हटकर शिक्षकेत्तर कर्मियों ने शासी निकाय के सचिव सहित विश्वविद्यालय को लिखित आवेदन देकर कहा है कि आगामी 5 मई तक अगर शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मियों को अनुदान की राशि नहीं दी गई तो वे 6 मई से हड़ताल पर जाएंगे। इसको लेकर -शिक्षकेत्तर कर्मियों का कहना है कि मामला जो भी हो लेकिन अनुदान वितरण में अनियमितता का मामला शिक्षकों से संबंधित है। इसके लिए शिक्षकेत्तर कर्मियों के अनुदान की राशि लंबित रखना अन्याय है। बता दें कि पूर्व के प्रभारी प्राचार्य ने इस महाविद्यालय में मात्र 9 विषयों का ही संबंधन होने की लिखित जानकारी विश्वविद्यालय एवं सरकार को दी थी, जिसके बाद से ही यहां विवाद चल रहा है। इस महाविद्यालय में संबंधन चाहे 9 विषयों का ही हो लेकिन लंबे समय से यहां कई विषयों के शिक्षक अपना योगदान देते आ रहे हैं और उक्त विषयों से जुड़े छात्र-छात्रा तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय से सफल भी होते आ रहे हैं। इस महाविद्यालय को पूर्व से अनुदान भी मिल रही है, लेकिन इधर संबंधन प्राप्त शिक्षकों की सूची पूर्व के प्राचार्य द्वारा विश्वविद्यालय एवं सरकार को भेजे जाने के बाद तथा अनुदान की राशि सभी शिक्षकों को समान रूप से वितरण कर दिए जाने के बाद भी एक शिक्षक निरंजन चौधरी हाई कोर्ट चले गए थे। इसके बाद हाईकोर्ट एवं प्राधिकार के आदेश के आलोक में गैर संबंधन प्राप्त शिक्षकों से राशि वापस लेने का निर्देश महाविद्यालय को प्राप्त हुआ है। अब इस उधेड़बुन में अनुदान की राशि महाविद्यालय कोष में आने के बाद भी वितरण कार्य अधर में है। इधर महाविद्यालय कर्मियों का कहना है कि शिक्षकों के इस मामले का खामियाजा -शिक्षकेत्तर कर्मचारी क्यों भूगतेंगे? अगर 5 मई तक हम लोगों को अनुदान की राशि नहीं दी गई तो हम सभी कर्मचारी हड़ताल पर चले जाएंगे। कॉलेज सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि अनुदान की राशि विश्वविद्यालय से प्राप्त करने के लिए कॉलेज के शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मियों से आठ हजार से लेकर 27 हजार रुपए तक का अवैध उगाही कॉलेज प्रशासक की मिलीभगत से होने की बात भी उजागर हुई है कॉलेज के कई व्याख्याताओं एवं शिक्षक कर्मियों ने नाम नहीं छापने की बात पर बताया है कि लंबित पड़े हुए अनुदान की राशि विश्वविद्यालय से मंगवाने के नाम पर उनसे अग्रिम राशि भी ली गई है। वहीं अनुदान की राशि महाविद्यालय आने के बाद जब वितरण का समय आया तो मामले को सुलझाने के जगह पर सोची समझी साजिश के तहत हड़ताल पर जाने की चेतावनी दे रहे है। वहीं कॉलेज के शासी निकाय के सदस्यों आदि का कहना है कि प्राधिकार द्वारा जो जजमेंट दिया गया है उसी के अनुरूप अनुदान की राशि वितरित की जाएगी। वहीं अनुदान की राशि से वंचित होने की प्रबल संभावना को देखते हुए कॉलेज के शिक्षक कर्मियों ने हाई कोर्ट में सीडब्ल्यूजेसी याचिका दायर कर रखा है। इन लोगों का कहना है कि जब तक हाई कोर्ट का स्टे ऑर्डर नहीं आ जाता है, तब तक अनुदान की राशि पर रोक लगी रहनी चाहिए। वहीं विगत 3 जनवरी 2018 से लगातार 31 अगस्त 2023 तक कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य रहे प्रोफेसर जीवन प्रसाद सिंह का कहना है कि डीएन सिंह कॉलेज को प्रतिष्ठा (ऑनर्स) के लिए सिर्फ 9 विषय हिंदी, इतिहास, राजनीति शास्त्र, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, ग्रामीण अर्थशास्त्र, संस्कृत, श्रम एवं समाज कल्याण तथा कॉमर्स के साथ-साथ पास कोर्स के 13 विषयों में से अंग्रेजी, फिलॉसफी, गृह विज्ञान, भूगोल, मनोविज्ञान, गांधी विचारधारा, प्राचीन भारतीय इतिहास एवं संस्कृति, उर्दू के अलावे भौतिकी, रसायन शास्त्र, जीव विज्ञान, जंतु विज्ञान तथा गणित में संबंधन प्राप्त था। इधर कॉलेज के वर्तमान प्रभारी प्राचार्य डॉक्टर महेंद्र प्रसाद सिंह ने जानकारी देते हुए बताया है कि विश्वविद्यालय से कॉलेज को अनुदान की राशि प्राप्त करने के लिए कॉलेज के शिक्षक कर्मियों से राशि लिए जाने की बात स्वीकार की है। उन्होंने आगे बताया कि पूर्व प्राचार्य द्वारा विश्वविद्यालय एवं सरकार को मात्र 9 विषयों में ही संबंधन से संबंधित लिखित जानकारी दी गई थी। यहां तक महालेखागार, विश्वविद्यालय, सरकार एवं प्राधिकार द्वारा भी 9 विषयों के संबंधन प्राप्त होने की बात कही गई है। प्रभारी प्राचार्य डॉ. महेंद्र प्रसाद सिंह ने आगे बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा 2010 से पास कोर्स की पढ़ाई समाप्त कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 9 विषयों के अलावे किसी अन्य पास कोर्स विषयों वालों को अनुदान की राशि वितरण करने का कोई भी औचित्य नहीं है। हाई कोर्ट से तत्काल स्टे ऑर्डर आदि आने की स्थिति में कॉलेज शासी निकाय का जो आदेश होगा, उसके अनुसार अनुदान वितरण से संबंधित आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रभारी प्राचार्य डॉ. महेंद्र प्रसाद सिंह ने स्पष्ट तौर पर कहा यह जो भी हुआ है पूर्व प्राचार्य द्वारा दिए गए रिपोर्ट कार्ड का ही परिणाम है। उन्होंने आगे कहा 5 मई से धरना पर बैठने की सूचना प्राप्त हुई है। इसको लेकर कॉलेज शासी निकाय का जो आदेश होगा उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

रिपोर्ट केआर राव

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