महारुद्र यज्ञ में शिव विवाह प्रसंग को सुन भावविभोर हुए श्रद्धालू

महारुद्र यज्ञ में शिव विवाह प्रसंग को सुन भावविभोर हुए श्रद्धालू

बांका:चांदन प्रखंड मुख्यालय के उच्च विद्यालय मैदान में चल रहे महारुद्र यज्ञ में तीसरे दिन की  संध्या कथा वाचिका साध्वी पीताम्बरा दीदी ने शिव पार्वती विवाह का प्रसंग का वर्णन किया। इस विवाह प्रसंग को सुन खचाखच भरे पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। इस दौरान शिव पार्वती विवाह की भव्य झांकी का चरित्र चित्रण किया गया। ये झांकी श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी रही, विवाह प्रसंग के दौरान शिव पार्वती की झांकी पर श्रद्धालुओं ने पुष्प बरसाये। देवाधिदेव शिव एवं माता पार्वती के इस विवाह में श्रद्धालु झूमकर विवाह गीत गाने लगे। प्रसंग का वर्णन करते हुए कथावाचिका साध्वी पीताम्बरा दीदी ने कहा कि पर्वत राज हिमालय की घोर तपस्या के बाद उनके घर अवतरित माता पार्वती बचपन से ही बाबा भोलेनाथ की अनन्य भक्त थीं, एक दिन पर्वतराज के घर महर्षि नारद पधारे और उन्होंने भगवान भोलेनाथ के साथ पार्वती के विवाह का संयोग बताया। लेकिन विवाह के दिन नंदी पर सवार भोलेनाथ जब भूत पिशाचों के साथ बरात लेकर पहुंचे तो उसे देखकर पर्वतराज और उनके परिजन अचंभित हो गए। लेकिन माता पार्वती खुशी से भोलेनाथ को पति के रूप में स्वीकार कर लिया। शिव-पार्वती प्रसंग का वर्णन करते हुए कथावाचिका साध्वी पीताम्बरा  ने कहा कि शिव पार्वती की आराधना भागवत का अभिन्न अंग है। इसके श्रवण से ही मनुष्य के सारे मानसिक व आत्मीय विकारों का अंत हो जाता है। उन्होंने कहा की ईश्वर के प्रति समर्पण भाव से ही प्रभु मिलते हैं। प्रसंग में बताया कि भगवान की कथा जीवन जीना सिखाती है व सनातन धर्म के प्रति उनके जीवन में संस्कार गढ़ती है। इस शिव विवाह प्रसंग में मुख्य प्रवचनकर्ता साध्वी पीतांबरा दीदी के साथ संगीत की धुन में ऋषभ दूबे, वंश मिश्रा,हर्षित मिश्रा,राज नागर, शिवी दीदी मुख्य सहयोगी बने रहे।
संध्या सात बजे से रात्रि 10 बजे तक शिव विवाह प्रसंग और रात्रि 10 बजे से वृंदावन से आए हुए प्रख्यात कलाकारों द्वारा रास लीला का कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया।


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