भूमाफिया औऱ फर्जी कागजात से सरकारी जमीन का हो रहा है दाखिल खारिज

भूमाफिया औऱ फर्जी कागजात से सरकारी जमीन का हो रहा है दाखिल खारिज

बांका:चांदन प्रखंड के सिलजोरी पंचायत के भनरा मौजा में सरकारी जमीन को स्थानीय पदाधिकारी औऱ राजस्व कर्मचारी की मिलीभगत से फर्जी कागजात के आधार पर निजी जमीन बता कर अतिक्रमण मामले पर बिहार भूमि सुधार विभाग द्वारा जिलाधिकारी से 15 दिनों के अंदर रिपोर्ट मांगने की खबर सामने आने के बाद कई भूमाफिया में खलबली मच गई है। जबकि कुछ भूमाफिया कुछ स्थानीय नेताओं के पास जाकर इस मामले को रफा दफा कराने का प्रयास कर रहे है। इस मामले को पहले विधानपार्षद विजय सिंह और अब तरुण कुमार द्वारा भी मामला विधान परिषद में उठाया गया।उसके बाद भी पदाधिकारी की नींद खुली। वैसे इस प्रकार का सैकड़ो मामले अभी भी फाइलों में बंद है। और उसपर धूल जम रही है। जबकि पूर्व अपर समाहर्ता माधव कुमार द्वारा चांदन, बिरनिया, सिलजोरी,और कोरिया पंचायत के विभिन्न मौजे के करीब 1000 एकड़ की जमीन का जमाबंदी रद्द किया जा चुका है। जिसका आदेश अंचल कार्यालय पहुंचने के बाद भी उस जमीन से दखल अतिक्रमण कारियों का ही बना हुआ है। जबकि आदेश के बाद उस जमीन को खाली कराकर उसपर पेड़ लगाने का भी आदेश हुआ है। इस प्रखंड में अभी भी सैकड़ो मामले सरकारी जमीन पर गलत और फर्जी कागजात के आधार पर जमाबंदी दर्ज होने का मामला अंचल एवं समाहर्ता के पास लंबित है।जबकि चांदन काली मंदिर, हाट,पंचायत भवन सहित कई सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के आदेश के बाबजूद उसे हटाने में पदाधिकारी कोई दिलचस्पी नही ले रहे है। जिस कारण प्रखंड भर में लगातार सरकारी जमीन अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। सरकारी जमीन पर कब्जा करने में सिर्फ भूमाफिया ही नही बल्कि कई पंचायत प्रतिनिधियों और बड़े बड़े नेता का भी भूमाफिया को प्रश्रय मिल रहा है। आज के दिनों में भी इस प्रखंड में जाली हुकमनमा,बन्दोबस्ती परवाना,रिटर्न,फर्जी राजस्व रसीद,भूदान इत्यादि का कागज बन और बिक रहा है। जिससे भूमाफिया सहित अन्य मालामाल हो रहा है। इसी कारण और फर्जी कागजात के आधार पर एक ही जमीन की कई बार जहां बिक्री हो रही है वही पैसे और पैरवी पर उस जमीन का दाखिल खारीज भी हो रहा है। जिससे भूमि विवाद के साथ साथ न्यायालय में जमीनी विवाद भी लगातार बढ़ता जा रहा है। इस संबंध में सीओ रविकांत कुमार का कहना है कि सभी आदेश का धीरे धीरे पालन हो रहा है। औऱ सरकारी जमीन पर गलत जमाबंदी के रद्दीकरण के लिए भी वरीय पदाधिकारी के पास रिपोर्ट भेजी जा रही है।


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