केवीके माधोपुर की 16 वी एवं नरकटियागंज की 6 वी वैज्ञानिक सलाहकार समिति की समीक्षा बैठक सम्पन्न ::

केवीके माधोपुर की 16 वी एवं नरकटियागंज की 6 वी वैज्ञानिक सलाहकार समिति की समीक्षा बैठक सम्पन्न ::

    केवीके माधोपुर में आयोजित समीक्षा बैठक

चम्पारण नीति / बेतिया (प.च.) 
आज कृषि विज्ञान केन्द्र, माधोपुर की 16वीं एवं कृषि विज्ञान केन्द्र, नरकटियागंज की 6वीं वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक दिनांक 29 अगस्त 2025 को कृषि विज्ञान केन्द्र, माधोपुर, पश्चिम चम्पारण के सभागार में अत्यंत गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुई।                    बैठक की अध्यक्षता डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा (समस्तीपुर) के माननीय कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) पी. एस. पाण्डेय ने की। बैठक का शुभारम्भ अतिथियों के स्वागत एवं परिचय के साथ हुआ। बैठक में दोनों कृषि विज्ञान केन्द्रों के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह (वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान, केवीके माधोपुर) तथा डॉ. आर. पी. सिंह (वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान, केवीके नरकटियागंज) ने क्रमशः पिछली बैठक में लिए गए निर्णयों पर की गई कार्यवाही की विस्तृत जानकारी समिति के समक्ष प्रस्तुत की। इसके साथ ही उन्होंने विगत एक वर्ष के दौरान केन्द्रों द्वारा किए गए कार्यक्रमों, प्रशिक्षणों, प्रदर्शन इकाईयों, अनुसंधान कार्यों, प्रकाशनों, कृषक संपर्क गतिविधियों, प्रगतिशील किसानों के सहयोग से हुए सफल प्रयासों तथा कृषि के विविध क्षेत्रों में हुई प्रगति का विस्तृत प्रतिवेदन (प्रगति रिपोर्ट) समिति के सामने रखा।
प्रस्तुत प्रतिवेदन पर विचार करते हुए सलाहकार समिति के सभी सदस्यों ने इसे ध्यानपूर्वक सुना और उसमें किए गए प्रयासों की सराहना की। समिति के सदस्यों ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि दोनों केन्द्रों ने अल्प समय में कृषि के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है और किसानों तक नवीनतम तकनीकों को पहुंचाने का कार्य प्रभावी ढंग से किया है। सदस्यों ने कृषि के समग्र विकास हेतु कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिनमें विशेष रूप से नई कृषि तकनीकों के तीव्र प्रसार, कृषि अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने, जलवायु आधारित कृषि मॉडल अपनाने, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन देने, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, मत्स्य पालन, पशुपालन और उद्यानिकी जैसे आयामों पर विशेष ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। इसके साथ ही समिति ने कृषक प्रशिक्षणों की संख्या और प्रभावशीलता बढ़ाने, स्थानीय स्तर पर बीज उत्पादन एवं पौधशाला के सुदृढ़ीकरण, जैविक खेती और प्राकृतिक खेती के प्रसार तथा मृदा एवं जल परीक्षण प्रयोगशाला की गतिविधियों को और सशक्त बनाने के सुझाव भी दिए।
बैठक के उपरांत माननीय कुलपति महोदय सहित अन्य गणमान्य सदस्यों ने कृषि विज्ञान केन्द्र, माधोपुर में स्थापित विभिन्न प्रदर्शन इकाईयों और गतिविधियों का अवलोकन किया। इस अवसर पर उन्होंने फसल प्रदर्शन प्लॉट, उद्यानिकी इकाई, पौधशाला, मशरूम उत्पादन इकाई, इकाई, मत्स्य इकाई, तथा किसानों के लिए स्थापित किए गए अन्य संसाधन केन्द्रों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र, माधोपुर ने बहुत ही कम समय में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं और किसानों के बीच वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने केवीके माधोपुर के वरीय वैज्ञानिक डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह सहित पूरी टीम की प्रशंसा करते हुए कहा कि जिस प्रकार की प्रगति और बदलाव अल्प अवधि में दिखाई दे रहे हैं, वह अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में यह केन्द्र और भी मजबूती से जिले के किसानों के लिए तकनीकी सहयोग का स्तम्भ बनेगा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय एवं जिले के कई गणमान्य पदाधिकारी और विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे, साथ ही जिले के कई प्रगतिशील किसानों की सक्रिय भागीदारी भी रही। जैसे दीपेन्द्र दुबे, राघव शरन प्रसाद, सीमा देवी, सुशील जायसवाल, गीता ठाकुर, आनंद सिंह एवं अन्य कई कृषक शामिल थे, जो अपने अनुभव साझा किए और दोनो केन्द्रों द्वारा किए गए प्रयासों पर संतोष व्यक्त किये।                          कृषि विज्ञान केन्द्रों के समस्त वैज्ञानिक एवं कर्मचारी गण भी इस बैठक में उपस्थित रहे। इनमें मुख्य रूप से डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह, डॉ. आर. पी. सिंह, डॉ. सौरभ दूबे, डॉ. चेलपुरी रामुलू, डॉ. हर्षा बी. आर., डॉ. जगपाल, डॉ. रतुल मौनी राम, डॉ. अभिक, डॉ. भूषण एवं डॉ. पंकज एवं दोनों केन्द्रों के  कर्मचारियों की सहभागिता उल्लेखनीय रही।
यह बैठक न केवल विगत वर्ष की प्रगति और गतिविधियों की समीक्षा के लिए नही थी बल्कि आने वाले वर्षों की कार्ययोजना तैयार करने, किसानों के लिए और अधिक प्रभावी कार्यक्रम संचालित करने तथा प्रसार गतिविधियों को नई दिशा देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हुई। बैठक में व्यक्त किए गए विचारों एवं सुझावों से निश्चित ही दोनों कृषि विज्ञान केन्द्रों की कार्यप्रणाली और भी सशक्त होगी और किसानों के जीवन स्तर में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान सुनिश्चित होगा।

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