धान की सीधी बुआई से किसानों को अधिक उत्पादन एवं लागत में आएगी कमी

धान की सीधी बुआई से किसानों को अधिक उत्पादन एवं लागत में आएगी कमी

    धान की सीधी बुआई किसानों हेत लाभकारी

चम्पारण नीति / बेतिया (प.च.)
आज बदलते जलवायु परिवर्तन के समय पर किसान भाइयों को नवीनतम तकनीक की जानकारी नहीं होने के कारण उत्पादन लागत में वृद्धि एवं उत्पादकता में भी कमी हो रही है जिससे किसान भाई खेती को फायदे की तरफ नहीं ले जा पा रहे हैं।                                      कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ अभिषेक प्रताप सिंह ने बताया कि किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए धान उत्पादक किसान को प्रशिक्षित कर धान की सीधी बुवाई के लिए प्रेरित किया गया था। जिसमें कुछ किसानों के प्रक्षेत्र पर अग्रिम पंक्ति प्रत्यक्षण के अंतर्गत सीधी बुवाई कराई गई जिसका सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहा है एवं कृषि विज्ञान केंद्र के प्रक्षेत्र में भी सीधी बुवाई का प्रत्यक्षण किया गया है जो धान की रोपाई के तुलना में कम खर्चीला है एवं उत्पादन भी अधिक होगा। केंद्र के कृषि अभियंत्रण वैज्ञानिक डॉ चेलपुरी रामुलु ने बताया कि धान की सीधी बुवाई से खेत में लगातार पानी भरें रखने की आवश्यकता नहीं होती है, इस प्रकार लगभग 20 से 25% पानी की बचत होती है वहीं पर रोपाई में अधिक श्रम की जरूरत पड़ती है जबकि इस तकनीक में बीज सीधे बुआई जीरो टिलेज मशीन से की जाती हैं जिससे पौधे मजबूत और सुखा के प्रति सहनशील होते हैं और पोषक तत्वों का समुचित उपयोग होता है।इस तकनीक में खेत में ज्यादा पानी नहीं भरा रहने से मेथेन गैस का उत्सर्जन भी काफी कम होता है जो पर्यावरण के अनुकूल और जलवायु परिवर्तन में एक अहम भूमिका निभा सकती है किसानो की बात माने तो उनका कहना है कि अगली बार सत् प्रतिशत  धान की सीधी बुवाई करेंगे क्योंकि किसान भाइयों का मुख्य उद्देश्य कम लागत अधिक उत्पादन एवं खेत की उर्वरा शक्ति को बरकरार रखना होता है। नौतन ब्लॉक के झकरा गांव के किसान श्री संजय कुमार ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र के सहयोग से धान की सीधी बुवाई किया हूं फसल में बलिया निकल रही है सामान्य रोपाई की तुलना में अभी इसमें कल्लो की संख्या में 20 से 25%  की वृद्धि  दिखाई दे रही है और आशा है कि उत्पादन भी रोपाई वाले धान की तुलना में 25 से 30% अधिक उत्पादन होगा।

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