नहाय खाय के साथ चार दिन तक चलने वाला छठ महापर्व शुरू।

नहाय खाय के साथ चार दिन तक चलने वाला छठ महापर्व शुरू।

बांका:लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ शनिवार से शुरू से हो रहा है। छठ पूजा की शुरुआत पहले दिन नहाय-खाय के साथ होती है। छठ महापर्व सूर्य उपासना का पर्व है। पर्व में भगवान सूर्य के साथ छठ माता की पूजा विधि-विधान के साथ की जाती है। 26 को खरना, 27 को संध्या अर्घ्य और 28 को उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ पर्व का समापन होगा। मान्यता है कि छठ का व्रत संतान प्राप्ति की कामना, संतान की कुशलता, सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है। प्रखंड के दुर्गामंदिर समिति के आचार्य पंडित लालमोहन पांडेय ने बताया कि यह व्रत कठिन माना जाता है।इसमें 36 घंटों तक कठिन नियमों का पालन करते हुए व्रत रखा जाता है। व्रत रखने वाले लोग चौबीस घंटे से अधिक समय तक निर्जला उपवास रखते हैं। मुख्य व्रत षष्ठी तिथि को रखा जाता है, लेकिन छठ पूजा की शुरुआत कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से हो जाती है। उन्होंने बताया कि भगवान भास्कर को अर्पित की जाने वाली प्रसाद में सबसे अहम ठेकुआ को माना जाता है। दर असल यह ठेकुआ आटे चीनी और दूध के मिश्रण से बना हुआ एक पकवान है। इस पकवान को भी बनाने का एक बड़ा महत्व है। इस गेंहू का खास महत्व है, क्योंकि इसी गेहूं के आटे से ही भगवान भास्कर का प्रसाद बनेगा। गेंहू की सफाई से लेकर इसे सुखाने की विधि किसी साधना से कम नहीं। इस गेहूं की सफाई से लेकर इसके सूखने तक व्रती इस गेंहू का खास ख्याल रखती हैं। सुबह से ही व्रती गेहूं के पास बैठ इसकी निगरानी करती हैं, ताकि कोई पक्षी या फिर पशु इसे जूठा न कर दे। साथ ही महिलाएं गेहूं सुखाते समय छठ मैया और भगवान भास्कर के गीत भी गाती हैं। यह मधुर गीत अभी तीन दिनों तक सुनने को मिलेगा। उन्होंने बताया कि छठ महापर्व मुख्य रूप से कलुआ घाट,नावाडीह घाट, बेंहगा घाट, नावाडीह घाट सहित सिलजोरी,कोरिया,इत्यादि घाटों पर यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता हैं।



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