चम्पारण नीति/बेतिया(प.च.) पोषक तत्वों से भरपूर है लाल केला, खेती सामान्य केले की तरह ही की जाती है.
बाजार की मांग और पोषक तत्वों को ध्यान में रखते हुए खेती में नवीनतम तकनीकों एवं किस्मों को अपनाकर ही आमदनी बढ़ाई जा सकती है।
कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने बताया कि यदि किसान सामान्य केले की जगह लाल केला लगाएं तो उन्हें निश्चित रूप से हरे केले की तुलना में अधिक लाभ होगा। अपनी उच्च पोषक क्षमता और बाजार में अधिक कीमत के कारण यह किसानों के लिए बेहद फायदेमंद है। लाल केले में फाइबर, आयरन और विटामिन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
पोषक तत्वों से भरपुर - लाल केले की खेतीइसके लिए गर्म और आर्द्र मौसम उपयुक्त है तथा तापमान 15° सेल्सियस से 40° सेल्सियस के बीच होना चाहिए। डॉ. सिंह ने बताया कि इसके सफल उत्पादन के लिए अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ दोमट मिट्टी, जिसका पीएच मान 6 से 7.5 के बीच हो, उत्तम मानी जाती है।
अगर खेत की तैयारी एवं रोपाई की बात करें तो पौधे लगाने का सबसे उपयुक्त समय जून से जुलाई (वर्षा ऋतु) है, परंतु फरवरी से मार्च के महीने में भी रोपाई की जा सकती है। खेत की अच्छी तरह जुताई करके डेढ़ फीट गहरे एवं डेढ़ फीट चौड़ाई के गड्ढे खोदें। गड्ढों में सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट मिलाएं।
उन्नत किस्मों में रेड ढाका, रेड स्पैनिश, कोलोराडो, रेड क्यूबन एवं रेड वेलची प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त कुछ स्थानीय किस्में भी उपलब्ध हैं।
रोपाई के लिए टिश्यू कल्चर के पौधे या स्वस्थ सकर्स का उपयोग करें। यदि सकर्स का उपयोग करते हैं तो कार्बेन्डाजिम 50% WP का 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर सकर्स को आधा घंटा डुबोने के उपरांत ही पौधों की रोपाई करनी चाहिए।
केले को पानी और पोषक तत्व समय पर मिलने से उत्पादन एवं फलों की गुणवत्ता अच्छी होती हैं इसलिए सिंचाई एवं उर्वरक प्रबंधन बहुत ही जरूरी है इसके लिए गर्मियों में प्रत्येक 4 से 5 दिन पर और सर्दियों में 10 से 12 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें। ड्रिप सिंचाई प्रणाली सबसे अच्छी मानी जाती है। समय-समय पर जैविक खाद, नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की उचित मात्रा वैज्ञानिकों की सलाह से देनी चाहिए।
केंद्र के पौधा संरक्षण वैज्ञानिक डॉ. सौरभ दुबे ने बताया कि लाल केले की पैदावार और कमाई अधिक होती है। लाल केले का पौधा सामान्यतः 12 से 15 महीने में फल देने के लिए तैयार हो जाता है। इस किस्म में कीट एवं बीमारियों का प्रकोप बहुत ही कम मात्रा में देखा गया है। बाजार में इसकी मांग अधिक होने के कारण सामान्य केले की तुलना में इसका मुनाफा भी काफी ज्यादा होता है।

