महान उपन्यासकार, मुंशी प्रेमचंद के जीवन दर्शन से प्रेरणा लें देश के युवा !

महान उपन्यासकार, मुंशी प्रेमचंद के जीवन दर्शन से प्रेरणा लें देश के युवा !



बेतिया।मुंशी प्रेमचंद्र की 140  वी जयंती पर,सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन द्वारा भावभीनी श्रद्धांजलि का कार्यक्रम किया गया,सत्या,ग्रह रिसर्च फाउंडेशन के सचिव सह संयुक्त राष्ट्र संघ के वाणिज्य एवं सामाजिक परिषद के चेयरमैन डॉ एजाज अहमद (अधिवक्ता) ने भारत के महान साहित्यकार, मुंशी प्रेमचंद्र को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आज ही के दिन आज से 140 वर्ष पूर्व 31 जुलाई 1880 इ0को मुंशी प्रेमचंद का जन्म हुआ था! उनका सारा जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित रहा !विभिन्न सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने के लिए महान उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में नई जागृति लाने का प्रयास किया था ,नमक का दारोगा एवं ईदगाह  जैसे रचनाओं ने नई पीढ़ी में जागृति लाने का प्रयास किया था!राजभाषा हिंदी एवं उर्दू भाषा के लिए उन्होंने जो प्रयास किया उसे भुलाया नहीं जा सकता, इस अवसर पर बिहार विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के डॉ0 शाहनवाज अली ने कहा कि नई पीढ़ी को मुंशी प्रेमचंद के जीवन दर्शन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है!मातृभाषा हिंदी एवं उर्दू के माध्यम से उन्होंने समाज में नई जागृति लाई थी! आज के परिपेक्ष में भी नई पीढ़ी को मुंशी प्रेमचंद्र की जीवन दर्शन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है !कवियों एवं साहित्यकारों के सम्मान में,बेतिया ,पश्चिम चंपारण में राष्ट्रीय कवि एवं साहित्यकार राष्ट्रीय स्मारक की स्थापना की जाए ताकि नई पीढ़ी कवियों एवं साहित्यकारों के योगदान को जान सके,यही होगी सरकार द्वारा सच्ची श्रद्धांजलि!