बेसहारा पशुओं की देखरेख की जवाबदेही किसकी - विहिप बजरंग दल


(मनीष कुमार /चम्पारण नीति)
बेतिया।जैसा कि नगर के अधिकांश प्रबुद्ध लोगो को पता है कि पिछले 2 दिनो से सुप्रिया रोड़ पर किसी अज्ञात वाहन ने एक  नन्दी महाराज (सांढ़) को ठोकर मार दिया था जिससे उसे गंभीर चोट लगी थी । अनेक माध्यमो से सूचना मिलने पर बजरंग दल के जिला संयोजक सोनू जी द्वारा पशुपालन विभाग के कर्मियों को बुलाकर उक्त नंदी का ईलाज औऱ टाँके लगवाया गया तथा पैर में चोट लगने की वजह से उक्त नंदी को वहां से उठाने में पशुपालन विभाग के कर्मियों द्वारा असमर्थता जताई । जिस कारण सड़क पर पड़े पड़े उक्त नंदी (सांढ़ ) आज मृत्यु को प्राप्त कर  गोलोक वाशी हो गयें ।विहिप के कार्यकर्ताओं द्वारा स्थानीय वार्ड पार्षद एवं नगर परिषद  के सभापति गरिमा सिकारिया को इसकी सूचना दी औऱ उनके माध्यम से जेसीबी तुरन्त मुहैया कराया गया । लेकिन विहिप के जिला मंत्री रमण गुप्ता ने जिले के अधिकारि जो बेतिया गौशाला के अधिकारियों पर सवाल भी उठाए साथ ही उन्होंने संगठन को बदनाम करने वाले सभी लोगो को आड़े हाथों लेते हुए अनेको सवाल उठाए की सिर्फ खबर बनाने की होड़ में कुछ लोग उनके संगठन को बदनाम करने लगे रहते है परंतु  जब सेवा का समय आता है तो उनके संगठन पर आरोप लगाने वाले लोग कही दिखाई नही देते। रमन गुप्ता ने ये भी कहा की सबसे ज्यादा कष्ट की बात ये है की जिलामुख्यालय बेतिया- में पशुपालन विभाग केवल नाममात्र का है, ना कोई संसाधन,ना उपचार हेतु आधुनिक उपकरण, ना पशुओं को रखने की कोई उचित व्यवस्था भी  नही है पशुपालन विभाग के अधिकारियों की सैलरी हजारों में और कमाई लाखों में । आख़िर सरकारी व्यवस्था कब सुधरेगी ? कब सरकारी गौशाला में ऐसे पशुओं को आश्रय मिलेगा ? कब पशुपालन विभाग सृदृढ होगा ? कब जिलाधिकारी महोदय इसपर संज्ञान लेंगे ? कब कोई मीडिया के बन्धु इसपर रिपोर्टिंग कर इसकी पोल खोलेंगे ?
ज़िलें में एक पवित्र औऱ सेवा भावना से काम करने वाली संस्था गौ समृद्धि धाम बेतिया को तो मिथ्या आरोप लगाकर बहुत बदनाम कर दिया अगर हिम्मत है तो इसपर आवाज उठाओ। यकीन मानें बहुत सारे तथ्य उपलब्ध कराने में हम मदद करेंगे । क्योंकि गौसेवा एकमात्र लक्ष्य है और वो किसी माध्यम से हो मंजूर है । एक बार पुनः जिलाधिकारी महोदय से आग्रह है इस विषय पर गंभीरता से चिंतन करें ताकि जिला मुख्यालय में पशुपालन विभाग की व्यवस्था सृदृढ हो सके । हालांकि इन सबकी बहुत बड़ी वजह नगर के वो पशुपालक है जो सिर्फ अपने फायदे के लिए गायो का व्यवसाय करते है और नर बच्चे और दूध न देने वाली गायो को सड़कों पर छोड़ देते है नगर प्रशासन को ऐसे गौ पालको के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए जिससे इन गौवंशो को उचित न्याय मिल सके । इसके लिए   नगर के प्रबुद्धजनों को आगे आना चाहिए। यह घटना इस और भी इशारा करती है बेतिया नगर में गौवंशो से आमदनी लेने में तो एक वर्ग आगे है परंतु नगर में 85 प्रतिशत से भी ज्यादा लोग हिन्दू होने के बाबजूद भी गौवंशो के लिए सड़कों पर बेसहारा होना भी एक सामाजिक कुरीति के समान है ।
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