रजौन (बांका): राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने बुधवार को संध्या में रजौन सब्जी हाट स्थित काली-दुर्गा मंदिर के प्रांगण में शरद पूर्णिमा उत्सव को मनाया। संघ गीत होने के साथ-साथ उपस्थित स्वयंसेवकों को खण्ड बौद्धिक शिक्षण प्रमुख डॉ. प्रोफेसर अमरेंद्र कुमार सिंह का बौद्धिक मिला। डॉ. अमरेंद्र ने शरद पूर्णिमा के महत्वों को बताने के साथ-साथ आरएसएस द्वारा शरद पूर्णिमा को मनाने के पीछे के उद्देश्यों को समझाया। अपने बौद्धिक में उन्होंने कहा कि शरद पूर्णिमा उत्सव की परंपरा वर्षो से चली आ रही है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पूर्णिमा की चांदनी से अमृत की वर्षा होती है, और उस अमृत का सेवन हम सभी खीर रूपी प्रसाद के रूप में करते हैं। संघ का मानना है कि इस खीर रूपी प्रसाद को हम सभी बिना ऊंच-नीच, जाति पंथ, अमीर-गरीब को भूलकर एक साथ जमीन में बैठकर समरसता के साथ ग्रहण करते हैं। इससे एक संदेश देते हैं कि हम सभी एक हैं। सभी स्वयंसेवक समाज में चंद्रमा की भांति अपनी चमक से समाजहित, देशहित में प्रकाशमान करता रहे। उन्होंने कहा कि आज महर्षि वाल्मिकी की भी जन्म जंयती है। उनकी जीवनी से हम सभी को यह प्रेरणा लेनी चाहिए कि कैसे वो गलत रास्ते को छोड़ कर रामायण जैसे महाकाव्य की रचनाकर परम् पूज्य हुए और आज पूरा हिन्दू समाज उनको पूज्यनीय मानता है। बौद्धिक के बाद पवित्र भगवा ध्वज लगाकर प्रार्थना के उपरांत खीर का प्रसाद वितरण करने के बाद उत्सव की समाप्ति की गई। इस अवसर पर जिला सेवा प्रमुख अमरेंद्र कुमार, खण्ड कार्यवाह रंजीत कुमार साह, खण्ड शारीरिक प्रमुख गौरव कुमार, खण्ड कुटुंब प्रबोधन प्रमुख डॉ. ब्रजबिहारी राव, खण्ड गौ संवर्धन प्रमुख मनमोहन यादव, किसान कार्य प्रमुख ओंकार भारती, मां गायत्री संयुक्त शाखा के मुख्य शिक्षक सौरभ कुमार सहित काफी संख्या में स्वयंसेवक व रजौन बाजारवासी उपस्थित थे।
रिपोर्ट:केआर राव