रजौन (बांका):इन दिनों प्रखंड क्षेत्र के किसानों के खेतों में धान की फसल काफी लहलहाती हुई दिख रही थी, ऐसा लग रहा था कि मानो इस बार धान की फसल बहुत अच्छी होगी, परंतु देवराज इंद्र के प्रकोप से किसान नहीं बच पाए। हर वर्ष कुछ ना कुछ ऐसा अनहोनी घटना घटित हो रही है। इस वर्ष भी कुछ ऐसा ही हुआ है। जिससे किसानों के चेहरों पर खुशी के जगह गम के बादल मंडराने लगे हैं। किसानों के साथ रविवार की जोरदार बेमौसम हुई बारिश एवं हवा के कारण जहां एक ओर पके हुए धान के खेतों में पानी भर गया है, वहीं धान के पौधे खेत में मुरझा कर गिर पड़े हैं। जिससे कि अब उनके कटाई में 15 से 20 दिन विलंब हो सकती है और उस खेत में रवि की फसल काफी प्रभावित होने की संभावना है। वहीं दूसरी ओर जिन किसानों के धान के पौधे में बालियां निकली हुई थी, उस पर जोरदार बारिश से फूल एवं परागकण झड़ गए। जिसके कारण से उत्पादन आधी होने की संभावना है तथा धान के पौधे भी गिर गए हैं, जिस कारण से उसकी कटाई में भी बड़ी समस्या आ सकती है। मालूम हो कि गिरे हुए फसल को कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई करने में या मजदूरों के द्वारा भी कटाई करने में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अब किसानों को अपने भाग्य पर आंसू बहाने के सिवाय कोई उपाय नहीं बचा है।
रिपोर्ट: केआर राव