मरद के दरद


समाचार मत,पूछs हमर
मत तूँ आपन,हाल कहs
निमन बानी, हम घर मे तूँ
नईहर मे,खुशहाल रहs


पावे खातिर,तोहरा के केतना 

केतना देव, गोहरावल बा

घीव के लड्डू , सवा सेर ले

केतना जघे,चढ़ावल बा

      तब जाके,अगुआ लोग आईल

      तबही तोहके, पावल बा

      इहे बतिया, सांच हवे ना

      तनिको कुछू,छीपावल बा

दिल के दीया,धुँआइल अब तूँ

उहवें केतनो,साल रहs

निमन बानी,हम घर मे तूँ

नईहर मे,खुशहाल रहs


चिंता चढ़ल,कपारे लागे 

दिल दिमाग के, कोड़ी हो

कबो -कबो, बुझाता अइसन

जिनगी संघत,छोड़ी हो

        गम मे गलत बा, देहिया अब ई 

        मास  हाड़ के,छोडी हो

        लागत बा,जिनगी से नाता 

        मउअत आके,जोड़ी हो 

सुनत -सुनत बा,कान गईल 

अब ना कवनो,जंजाल कहs

निमन बानी, हम, घर मे तूँ

नईहर मे,खुशहाल रहs

           


    
 -:  नवल प्रसाद

      बेतिया, पं चम्पारण

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