सरकार अपनी विफलताओं की आड़ मे शिक्षकों को ठगने की कोशिश न करे :- नंदन कुमार

बेतिया।शिक्षकों के प्रशिक्षण की व्यवस्था करना सरकार की जवाबदेही थी।संस्थानो एवं संसाधन के अभाव मे राज्य सरकार द्वारा नवप्रशिक्षित शिक्षकों को ससमय प्रशिक्षित नही किया जा सका जिसके लिए इन शिक्षकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है,जबकि इसके लिए शिक्षक दूर-दूर तक जिम्मेदार नही है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय द्वारा पूर्व मे कतिपय न्यायादेशों के माध्यम से यह स्पष्ट किया जा चुका है कि कोई भी नियोक्ता अपनी विफलताओं का लाभ नही उठा सकता है जबकि नवप्रशिक्षित शिक्षकों के संदर्भ मे राज्य सरकार अपनी विफलताओं का स्वयं लाभ उठाना चाह रही है जो किसी दृष्टिकोण से सही नही है।उक्त बाते परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिला महासचिव नंदन कुमार ने कही।

मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए नंदन कुमार ने कहा कि जो शिक्षक वेतनमान दिये जाने के पूर्व अप्रशिक्षित थे ,उन्होंने अबतक लगभग 7 वर्षो तक सेवा दी है और अपने इस सेवाकाल मे इन्होंने सेवाकाल के आधार पर दिये जानेवाले वार्षिक वेतन वृद्धियों को संरक्षित किया है जिसकी अनदेखी कैसे किया जा सकता है? अब जब ये प्रशिक्षित हो चुके है तो पूर्व के संरक्षित वेतन वृद्धियों को इनके इंट्री पे मे जोड़कर मूल वेतन का निर्धारण करना चाहिए ।तदनुसार वेतन का निर्धारण करना होगा।

        वर्तमान मे 1 अप्रैल 2021 के प्रभाव से दिए गये 15% वेतन वृद्धि के आलोक मे जब नवप्रशिक्षित शिक्षकों का वेतन निर्धारण किया जा रहा है तो इनके साथ नियुक्त प्रशिक्षित शिक्षको एवं नवप्रशिक्षित शिक्षकों के वेतन मे असंतोषजनक एवं मानमानीपूर्ण विसंगति उत्पन्न हो रही है जिसका प्रभाव शिक्षण कार्य पर भी पड़ेगा। 

      इसपर आक्रोश व्यक्त कर नंदन कुमार ने कहा कि यदि नवप्रशिक्षित शिक्षकों की सेवा के 2 वर्ष पूर्णता की तिथि से शिक्षकों को प्रशिक्षित घोषित करने एवं तदनुसार इंडेक्स-3 की बाध्यता समाप्त कर वेतन निर्धारण नही किया गया तो संघ इसके विरुद्ध निश्चित रूप से न्यायालय जायेगा।

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